मुजफ्फरपुर शेल्टर होम कांड पर सीएम नीतीश कुमार ने कहा- कोई हंसते हुए धरना देता है, सभी शेल्टर होम पर DM रखें नजर

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बिहार में बच्चों से जुड़े सभी सुधार या कल्याण गृहों का संचालन अब सरकार ही करेगी. किसी भी गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) के जरिए यह काम नहीं होगा. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी घोषणा की. यह घोषणा मुजफ्फरपुर में एक एनजीओ द्वारा संचालित बालिका गृह में बच्चियों से दुष्कर्म की घटना के संदर्भ में थी. नीतीश ने कहा कि इस मामले की जांच या तो सीबीआई करे या फिर हाईकोर्ट की निगरानी में इसकी पड़ताल हो. इस मुद्दे पर कुछ लोग प्रवचन तो बहुत देते हैं, लेकिन प्रवचन देने वाले यह भी बता दें कि पूरे देश में (सुधार गृहों की) क्या स्थिति है?

मुजफ्फरपुर की घटना के 72 दिन बाद बीते रविवार दिल्ली में हुए नौ विपक्षी दलों के धरने पर भी नीतीश ने सवाल उठाए. राजद नेता तेजस्वी यादव की अगुआई में हुए इस धरने में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी शामिल हुए थे. नीतीश ने कहा- हंसते हुए भी कोई धरना देता है? क्या यह धरना इनके लिए (बच्चियों की सुरक्षा के लिए) हो रहा था? सब जानते हैं कि धरना क्यों दिया जा रहा था? ऐसे धरनों में क्या कोई मुस्कुराते हुए कैंडल जलाता है?

समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा के इस्तीफे में देरी के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा- कोई मंत्री जिम्मेदार है तो कार्रवाई होगी. लेकिन इस मामले में मंत्री से हमने पहले ही दिन स्पष्टीकरण मांगा था. उन्होंने इस मामले में कोई भी भूमिका होने से इनकार कर दिया था.

नीतीश ने कहा कि टाटा इंस्टिट्यूट की रिपोर्ट से मुजफ्फरपुर के बालिका गृह में दुष्कर्म का खुलासा हुआ. जानकारी मिलते ही कार्रवाई हुई. सरकार अभी भी कई ऐसे सुधार गृह चला रही है जहां जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड बच्चों को भेजता है. लेकिन मुजफ्फरपुर के मामले में बालिकाओं को रखने का काम एक एनजीओ को दिया गया. एनजीओ ने एक मकान में बच्चियों को रखा. वहां जांच नहीं हुई. हमने सवाल उठाया कि एनजीओ को यह काम क्यों देना चाहिए? चीफ सेक्रेटरी से कहा है कि योजना बनाएं. बालक-बालिका गृह बनवाएं जाएं. वहां के लिए जरूरी स्टाफ की भी नियुक्तियां करें. मुजफ्फरपुर मामले में भी अगर तत्काल कोई मकान मिले तो वहां बच्चियों को रखें.



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