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हिमाचल के स्कूल में मरे मिले 18 चमगादड़, लोगों में 'निपाह वायरस' का खौफ

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हिमाचल प्रदेश के नाहन में 18 मरे हुए चमगादड़ों के पाए जाने के बाद प्रशासन अलर्ट हो गया है. बता दें कि केरल में निपाह वायरस (Nipah Virus) की चपेट में आने से अब तक 11 लोगों की मौत हो गई है. बताया जा रहा है कि निपाह वायरस चमगादड़ों की वजह से ही फैलता है. ऐसे में दिल्ली से सटे इस इलाके में निपाह वायरस के फैलने की आशंका से लोग डरे हुए हैं.

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, पशुपालन विभाग और वन विभाग की टीम बुर्मा पपड़ी स्कूल पहुंच गई है. अधिकारी मरे हुए चमगादड़ों का सैंपल ले रहे हैं. वे पूरे मामले की जांच कर रहे हैं. हालांकि, अभी अधिकारियों ने वायरस के अफवाह को खारिज कर दिया है.

वहीं स्कूल की प्रिंसिपल सुपर्णा भारद्वाज ने बताया कि यहां अक्सर इस मौसम में चमगादड़ आते हैं, लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है जब इतनी बड़ी संख्या में इनकी मौत हुई हो. उन्होंने कहा कि निपाह वायरस की आशंका को देखते हुए स्कूल प्रबंधन पूरी तरह से अलर्ट है.

जिला मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी संजय शर्मा ने कहा, हर साल इस इलाके में बड़ी संख्या में चमगादड़ दिखते हैं. वैसे इस बार इनकी संख्या कुछ ज्यादा ही थी. उन्होंने कहा, स्कूल के प्रिंसिपल और छात्रों ने बताया कि हर साल चमगादड़ आते हैं और इस तरह की घटना भी हर साल ही होती है. हालांकि, इस साल उनकी संख्या काफी ज्यादा है.

उन्होंने आगे कहा, हमने स्कूल के टीचर और छात्रों को वायरस के बारे में जानकारी दे दी है. हमने किसी भी तरह के फिजिकल कॉन्टेक्ट से उन्हें स्पष्ट मना कर दिया है. स्कूल की प्रिंसिपल सुपर्णा भारद्वाज ने कहा, निपाह वायरस की वजह से इस पूरे मामले में लोग डर गए थे. छात्रों को निपाह वायरस के बारे में पूरी जानकारी दे दी गई है.

क्या है निपाह वायरस?
निपाह वायरस दरअसल चमगादड़ से फैलता है. चमगादड़ जब फलों में दांत मारते हैं तो वो फल संक्रमित हो जाते हैं. इन संक्रमित फलों को खाने से इंसान चपेट में आ सकते हैं. संक्रमित व्यक्ति के जरिए ये बाकी इंसानों में फैल सकता है. इसी तरह चमगादड़ों के संपर्क में आने से ये सुअरों में फैलता है और फिर सुअरों के नजदीक रहने वाले या सुअरों का मांस खाने वालों में ये निपाह वायरस फैल सकता है.

अचानक से तेज बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द, उल्टियां, गर्दन का जकड़ना, रोशनी से दिक्कत होना शामिल है. बीमारी बढ़ने पर इंसान कोमा में जा सकता है.

साल 1998 में निपह वायरस का पहला मामला मलेशिया में सामने आया था. डब्ल्यूएचओ के मुताबिक सूअरों के जरिए ये बीमारी सामने आई.

 

भारत में इससे जुड़ा पहला मामला साल 2001 में पश्चिम बंगाल में सिल्लीगुड़ी जिले में सामने आया था. वहीं निपह वायरस का दूसरा मामला पश्चिम बंगाल के नादिया जिले में साल 2007 में सामने आया था. ये दोनों जिले बांग्लादेश के बॉर्डर से करीब हैं.



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