NEET की परीक्षा में प्रश्नपत्र को लेकर SC ने लगायी CBSE को फटकार, कहा- हर भाषा के पेपर में एक जैसे सवाल होने चाहिए

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सुप्रीम कोर्ट ने इस साल NEET के पेपर में अलग-अलग भाषा में अलग-अलग क्वेश्चन दिए जाने को लेकर सीबीएसई को फटकार लगाई है। गुरुवार को इस मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि हर लैंग्वेज और रीजनल लैंग्वेज में तैयार किए गए क्वेश्चन पेपर एक जैसे होने चाहिए। बता दें कि इस साल हुए NEET के एग्जाम पर स्टूडेंट्स ने सवाल उठाए थे। उनका आरोप था कि रीजनल लैंग्वेज में तैयार पेपर अंग्रेजी के मुकाबले कठिन थे।

 इस साल नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्‍ट हिंदी और अंग्रेजी के अलावा 8 लैंग्वेज में हुआ था। जिसमें असमी, बांग्ला, गुजराती, मराठी, कन्‍नड़, ओड़िया, तमिल और तेलुगू शामिल हैं। मदुरै बेंच में लगाई पिटीशन में कहा गया कि रीजनल लैंग्वेज में पूछे गए सवाल अंग्रेजी लैंग्वेज में पूछे गए सवालों के मुकाबले आसान थे। वहीं, गुजरात हाईकोर्ट में एक पिटीशन दाखिल कर कहा गया था कि गुजराती में पूछे गए सवाल अंग्रेजी के मुकाबले मुश्किल थे।  वहीं सीबीएसई ने इस मामले में कहा था कि सभी पेपरों को मॉडरेटरों ने तय करके एक ही लेवल का निकाला था। बोर्ड का कहना है कि सभी लैंग्वेज में पेपर का डिफिकल्टी लेवल एक जैसा ही था।

इस मामले ने इतना तूल पकड़ा कि यह कोर्ट तक जा पहुंचा। इसके बाद मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने 8 जून को डिक्लेयर किए जाने वाले NEET के रिजल्ट पर रोक लगा दी थी। इसके बाद CBSE ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। 12 जून को सुप्रीम कोर्ट ने मदुरै बेंच के फैसले पर रोक लगा दी थी। बता दें कि NEET के एग्जाम 7 मई को हुए थे। 23 मई को रिजल्ट डिक्लेयर किया गया था।

NEET के जरिए मेडिकल और डेंटल कॉलेज में एमबीबीएस और बीडीएस कोर्सेस में एंट्रेस मिलता है। इसके अलावा उन कॉलेजों में भी एंट्री मिलती है, जो मेडिकल कांउसिल ऑफ इंडिया और डेटल कांउसिल ऑफ इंडिया के तहत मान्यता प्राप्त होते हैं।



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