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शुक्रवार को आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत ने जम्मू-कश्मीर के एजुकेशन सिस्टम में सुधार करने का सुझाव दिया. उन्होंने कहा कि राज्य में सोशल मीडिया, कुछ मस्जिद और मदरसों के जरिए युवाओं के बीच गलत जानकारियां फैलाने का कैम्पेन चल रहा है. इसका मकसद उन्हें रेडिकलाइज करना है. इसे देखते हुए मदरसों और मस्जिदों पर कुछ कंट्रोल होना चाहिए. अगर सरकार एजुकेशन सिस्टम में सुधार करेगी तो इस समस्या से निपटा जा सकता है. इसमें बेसिक गड़बड़ियां हैं.

आर्मी डे मौके पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में जनरल विपिन रावत ने कहा कि युवाओं के रेडिकलाइजेशन को रोकने के लिए गलत जानकारियों को फैलने से रोका जाए. पत्थरबाजी में शामिल रहे काफी युवा स्कूलों से थे. इसलिए एजुकेशन सिस्टम में सुधार की जरूरत है. अगर आप कश्मीर के किसी भी स्कूल में जाएंगे तो आपको सभी क्लास रूम में 2 नक्शे मिलेंगे. एक भारत और दूसरा जम्मू-कश्मीर का. दूसरे मैप की जरूरत क्या है?

उन्होंने कहा कि अगर आप जम्मू-कश्मीर का नक्शा स्कूल में लगा रहे हैं तो देश के सभी राज्यों के मैप वहां होने चाहिए. इससे बच्चों के बीच ये भावना आने लगती है कि वह भारत का हिस्सा तो हैं, पर उनकी एक अलग पहचान भी है. राज्य के एजुकेशन सिस्टम में ही बेसिक गड़बड़ियां हैं.

जनरल रावत ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में DPS जैसे स्कूलों के स्टूडेंट भी पत्थरबाजी की घटनाओं में शामिल रह चुके हैं. इसीलिए हायर स्टेटस को ध्यान में रखते हुए अच्छे स्कूलों को आर्मी के जरिए चलाया जाए. राज्य में ज्यादा पब्लिक स्कूल और सीबीएसई स्कूल खोले जाने चाहिए. यही आगे बढ़ने का तरीका है. 
 



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