नवरात्रि 2017: माता कालरात्रि की पूजा आज, ध्यान मात्र से टलता है काल

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नवरात्रि के सातवें दिन मां दुर्गा के की सातवीं शक्ति देवी कालरात्रि की अराधना की जाती है. देवी कालात्रि को व्यापक रूप से माता देवी- काली, महाकाली, भद्रकाली, भैरवी, रुद्रानी, चामुंडा, चंडी और दुर्गा के कई विनाशकारी रूपों में से एक माना जाता है.

जानकारी के मुताबिक , देवी के इस रूप में सभी राक्षस,भूत, प्रेत, पिसाच और नकारात्मक ऊर्जाओं का नाश होता है. मां कालरात्रि का स्वरूप देखने में अत्यंत भयानक है, लेकिन ये सदैव शुभ फल ही देने वाली हैं. इसी कारण इनका एक नाम 'शुभंकारी' भी है. मां की अराधना से व्यक्ति को दुश्मन नुकसान नहीं पहुंचा पाते. देवी का सातवां रूप अकाल मृत्यु से भी बचाता है.

कहा जाता है तीनों लोकों में असुरों ने हाहाकार मचा रखा था. इससे लोग बेहद परेशान थे. जिसके लिए सभी देवतागण मां दुर्गा के पास गए. भगवान शिव ने मां दुर्गा से सभी भक्तों की रक्षा करने के लिए कहा. तब मां दुर्गा ने अन्य रूप धारण कर असुर रक्तबीज का वध किया. मां दुर्गा के इसी रूप को मां कालरात्रि कहा गया.

नवरात्रि की सप्तमी के दिन मां कालरात्रि की आराधना से सभी पापों से मुक्ति मिलती है और दुश्मनों का नाश होता है. माता का आशीर्वाद पाने के लिए इस श्लोक का जाप करें- एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता | लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी || वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा | वर्धन्मूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयन्करि ||

वहीं, मां को गुड़ की चीजों का भोग लगाएं और दान भी करें. इससे गरीबी दूर होती है और मां की कृपा मिलती है. नवरात्रि के सातवें दिन नीला रंग शुभ है. मनोविज्ञान के अनुसार नीला रंग दृढ़ता, साहस, शौर्य के साथ ही गंभीरता को भी दर्शाता है. गरबा करने जाएं तो हल्‍के नीले रंग के कपड़े पहने. हल्का नीला रंग शरीर को ठंडा रखता है.



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