Movie Review: फन्ने खां

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प्रोड्यूसर: भूषण कुमार, राकेश ओमप्रकाश मेहरा, अनिल कपूर, राजीव टंडन
डायरेक्टर: अतुल मांजरेकर
स्टार कास्ट: ऐश्वर्या राय, अनिल कपूर, राजकुमार राव, पिहू संद
म्यूजिक डायरेक्टर: अमित त्रिवेदी
रेटिंग ***1/2

सन 2000 में बेल्जियन के एक डायरेक्टर डोमिनिक डेरडेर ने फिल्म बनाई, एवरीवडी फेमस। उस फिल्म में पिता और बेटी की कहानी को दिखाया गया। राकेश ओम प्रकाश मेहरा की 'फन्ने खां' इसी फिल्म का रीमेक है। 

कहानी: फन्ने खां यानी प्रशांत शर्मा (अनिल कपूर) ओवरवेट बेटी पिहू संद का पिता है जिसे लगता है कि उसकी बेटी में सिंगिग का टैलेंट कूट-कूट कर भरा है। इस बात से दूसरा कोई सहमत नहीं है। फन्ने खुद भी एक सिंगर है। और अपने आदर्श मो. रफी की तरह नाम कमाना चाहता था लेकिन ऐसा नहीं हो सका। जैसा कि ज्यादातर भारतीय पैरेंट्स करते हैं वो अपनी बेटी के द्वारा अपना सपना पूरा करना चाहता है। यहां तक कि बेटी का नाम भी लता मंगेशकर से प्रेरित होकर लता ही रखता है। फन्ने की बेटी लता, बढ़िया सिंगर के रूप में बढ़ी होती है लेकिन ओवरवेट होने के कारण स्टेज फ्रेंडली नहीं है। लता को लगता है कि उसे पिता ने उसके लिए जो सपना देखा है उसके पूरा होने का कोई चांस नहीं है क्योंकि किसी को भी यहां तक की उसकी मां (दिव्या दत्ता) को भी नहीं लगता कि वो टैलेंटेड है। उसकी आइडियल है सेक्सी सिंगर बेबी सिंह (ऐश्वर्या राय) लेकिन वह उसके जैसा बनने के बारे में सोच भी नहीं सकती। अपने सपनों को पूरा करने को लेकर उस पर दबाव डालने की वजह से पिता से नफरत करती है। साथ ही किसी से भी सपोर्ट नहीं मिलने की वजह से भी फस्ट्रेट हो जाती है। तब फन्ने अपने बेटी का भाग्य बदलने के लिए कुछ बड़ा करने का डिसाइड करता है और अपने दोस्त अधीर ( राजकुमार राव) को बेटी की मदद के लिए कहता है।

फिल्म का म्यूजिक: म्यूजिक में नया कहने लायक थोड़ा ही है। जवां है मोहब्बत रीक्रिएशन है। हल्का-हल्का सुरूर नुसरत फतेह अली खान की एवरग्रीन हिट कव्वाली काे रीक्रिएट कर बनाया गया है। लेकिन सुनने में बढ़िया है। अमित त्रिवेदी के कई गानों पर पैर थिरकने लगते हैं। फिल्म के क्लाइमैक्स में मोनाली ठाकुर की आवाज का गाना फिल्म को दूसरे लेवल तक ले जाता है। 

अभिनय: अगर फिल्म में एक्टिंग की बात करें तो, अनिल कपूर फन्ने के रोल में पूरी तरह फिट हुए हैं। एक आदमी जो विपरीत परिस्थितियों से घबराने की जगह अदम्य साहस के बल पर लड़ना जारी रखता है। राजकुमार राव का रोल भी अच्छा है। कुछ सीन जिनमें एक्टिंग के ये दो महारथी साथ हैं वे कमाल के हैं। यंग टैलेंट पिहू ने पहली फिल्म से शानदार शुरूआत की है। उनका चार्म, एक्टिंग और खूबसूरती दिल जीत लेती है। ऐश्वर्या, फिल्म में इंडियन मेडोना लगी हैं। फर्स्ट हाफ बांधे रखता है लेकिन सैकेंड हाफ में कहानी भटकती है। क्लाइमैक्स थोपा हुआ लगता है।

निर्देशन: डेब्यू कर रहे डायरेक्टर अतुल मांजरेकर फन्ने खां की लोअर मिडिल क्लास लाइफ पर्दे पर दिखाने में सफल हुए हैं जो चॉल में रहता है और फैक्ट्री में काम करता है। फिल्म की कहानी इंटरेस्टिंग है आप फन्ने खां की जिंदगी में डूबते जाते हैं। आप फन्ने खां की सामान्य जिंदगी और उसके असामान्य सपनों से बंध जाते हैं, जब वह कहता है कि उसकी लाइफ का बस यही एक उद्देश्य है कि उसकी बेटी लता की आवाज लाखों लोगों तक पहुंचे।

अगर आप ऐश्वर्या राय, अनिल कपूर और राजकुमार राव, के जबर्दस्त परफ़ॉर्मेंस और बेहतरीन संगीत के लिए फिल्म एक बार जरूर देखनी चाहिए। फिल्म पूरी तरह से पैसा वसूल है।



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