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मालदीव में भारत का समर्थन करने वाले पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद की पार्टी को 87 में से 60 सीटें मिली हैं. नशीद की पार्टी मालदिवियन डेमोक्रेटिक पार्टी (एमडीपी) ने राष्ट्रपति चुनाव जीतने के बाद अब संसदीय चुनाव भी जीत लिया है. संसदीय चुनाव में नशीद की विरोधी प्रोग्रेसिव पार्टी ऑफ मालदीव (पीपीएम) को केवल 7 सीटें मिली हैं. 

नशीद की पार्टी का संसदीय चुनाव जीतना भारत के लिए खुशी की बात है. ऐसा इसलिए क्योंकि चीन भारत को घेरने के लिए पड़ोसी देशों में पैठ जमाने की अपनी योजना पर काम कर रहा है. ऐसे में नशीद की पार्टी का संसद में अधिक सीटें जीतना भारत के लिए जरूरी था. चुनाव में अन्य निर्दलीय उम्मीदवार भी नशीद की पार्टी का समर्थन कर सकते हैं.

भारत के लिए यह अच्छी बात है कि बीते सात महीने में नशीद की पार्टी ने दूसरी बड़ी जीत हासिल कर ली है. वहीं नशीद भारत के लिए इसलिए जरूरी हैं क्योंकि उन्हें हमेशा से भारत का समर्थन करने वाला माना जाता है. जबकि यामीन हमेशा भारत के विरोधी चीन के पाले में खड़े दिखे. यामीन के राष्ट्रपति रहते मालदीव और भारत के रिश्तों में खटास आ गई थी. 

सबसे जरूरी बात कि मालदीव से लक्षद्वीप केवल 750 किमी की दूरी पर स्थित है और इस रास्ते पर चीन की नजर है. 1200 द्वीपों वाला शहर होने के नाते मालदीव को समुद्री जहाजों के लिए महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है. भारत का ये मानना है कि अगर चीन मालदीव में निर्माण कार्य करता है तो यह उसके लिए अच्छा नहीं होगा. भारत नहीं चाहता कि चीन मालदीव के करीब पहुंचे. साल 2017 में चीनी नौसैनिक जहाज माले पहुंच गए थे. जिससे भारत की चिंता और अधिक बढ़ गई. जेल छोड़ने और फिर देश छोड़ने के बाद नशीद दोबारा सत्ता में वापस आए हैं.



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