गोवा से आया आपत्ति जनक बयान, चर्च कि मैगजीन में लिखा, मोदी सरकार का शासन हिटलर जैसा

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गोवा के एक चर्च की तरफ से निकाली जा रही मैगजीन में मोदी सरकार की आलोचना की गई है। मैगजीन में पब्लिश एक आर्टिकल में एनडीए के राज को जर्मनी के नाजियों जैसा बताया गया है। साथ ही ये भी कहा गया है कि देश में संवैधानिक प्रलय(constitutional holocaust) की स्थिति है। बता दें कि जर्मनी में 1939 में हिटलर के राज में करीब 60 लाख लोगों (यहूदियों) को मौत के घाट उतार दिया गया था, इनमें 15 लाख बच्चे थे।

- न्यूज एजेंसी के मुताबिक इस आर्टिकल को पणजी के एक वकील एफई नोरोन्हा ने लिखा है, जो रेनोवाकाओ (Renovacao) मैगजीन में पब्लिश हुआ है। इस मैगजीन को गोवा और दमन के ऑर्कबिशप पब्लिश करते हैं।

- आर्टिकल में गोवा के लोगों से 'पूरे देश में फैली तानाशाही' पर लगाम लगाने के लिए 23 अगस्त को होने वाले पणजी उप चुनाव में बीजेपी को हराने की अपील की गई है। इसमें लिखा है, "आप सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ वोट दें ताकि फासिस्टवादी ताकतों को देश में बढ़ने से रोका जा सके।"

- माना जा रहा है कि इससे राज्य के सीएम मनोहर पर्रिकर के लिए मुश्किल खड़ी हो सकती है, जो इस चुनाव में मैदान में हैं। बता दें कि गोवा में कैथोलिक लोगों की संख्या एक चौथाई से ज्यादा है।

भ्रष्टाचार, सांप्रदायिकता से बदतर है नाजीवाद

- आर्टिकल के मुताबिक 2012 में सभी गोवा को भ्रष्टाचार से मुक्त कराने के बारे में सोच रहे थे, 2014 तक इसकी कोशिश होती रही, लेकिन उसके बाद से हम भारत में हर दिन जिस चीज को तेजी से बढ़ता हुआ देख रहे हैं, वह और कुछ नहीं बल्कि संवैधानिक प्रलय है और हम इसके गवाह हैं।

- आर्टिकल में कहा गया है, "भ्रष्टाचार बेहद खराब चीज है, सांप्रदायिकता (communalism) उससे भी खराब, लेकिन नाजीवाद इन दोनों से बदतर है। भारत में अब सबसे बड़ा मुद्दा भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि आजादी, लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता (secularism) है।"

जो फासिज्म से सहमत हैं, उन्हें वोट न दें
- आर्टिकल में सीएम पर्रिकर का नाम लिए बिना कई बार उन पर निशाना साधा गया है। साथ ही वोटर्स से कहा गया है कि वे उन लोगों को वोट ना दें जिनका कोई कैरेक्टर नहीं है और जो बिना रीढ़ के हैं और साफ तौर पर फासिज्म से सहमत हैं।
- आर्टिकल में पणजी उपचुनाव को भारतीय लोकतंत्र में पैदा हो रही निगेटिविटी को रोकने का मौका बताया गया है और पर्रिकर के खिलाफ वोटिंग की अपील की गई है। बता दें कि गोवा में अपोजिशन पॉलिसी मैटर्स में यू-टर्न लेने के लिए पर्रिकर की कई बार आलोचना कर चुका है।

पर्रिकर ने कमेंट से इनकार किया
- पर्रिकर ने इस आर्टिकल पर कमेंट करने से इनकार किया है। उन्होंने कहा, "मैं इस पर कुछ नहीं कहना चाहता, अगर कोई जर्मनी का इतिहास पढ़ता है तो पढ़े, आप इससे उल्टे हालात महसूस करोगे।" बता दें कि पर्रिकर इसी साल मार्च में चौथी बार गोवा के सीएम बने थे। हालांकि सरकार बनाने के लिए आखिरी वक्त में गठबंधन करने के चलते उन पर अभी भी उंगली उठ रही है।



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