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केंद्र सरकार ने बुधवार को सर्वोच्च न्यायालय से कहा कि उसने शीर्ष सीबीआई (केंद्रीय जांच ब्यूरो) अधिकारियों- निदेशक आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के बीच इसलिए दखल दिया कि वे बिल्लियों की तरह लड़ रहे थे. केंद्र ने प्रमुख जांच एजेंसी की विश्वसनीयता और अखंडता को बहाल करने के लिए हस्तक्षेप किया. 

महाधिवक्ता के. के. वेणुगोपाल ने मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायाधीश संजय किशन कौल और न्यायाधीश के. एम. जोसेफ की पीठ से कहा, "सरकार आश्चर्यचकित थी कि दो शीर्ष अधिकारी क्या कर रहे हैं. वे बिल्लियों की तरह लड़ रहे थे."

सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा से शक्तियां छीनने के फैसले का बचाव करते हुए वेणुगोपाल ने कहा, सरकार ने अपने अधिकार क्षेत्र में काम किया है और अगर सरकार हस्तक्षेप नहीं करती तो भगवान जाने दो वरिष्ठ अधिकारियों की लड़ाई कैसे खत्म होती.

महाधिवक्ता ने ये बातें पिछली सुनवाई में वरिष्ठ अधिवक्ता फली एस. नरीमन, कपिल सिब्बल, दुष्यंत दवे और राजीव धवन के आरोपों के जवाब में कहा, जिन्होंने 29 नवंबर को पिछली सुनवाई में वर्मा की शक्तियां छीनने के सरकार की कार्रवाई की कानूनी वैधता पर सवाल उठाया था. 
 



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