आज है बॉलीवुड की 'ट्रेजिडी क्वीन' मीना कुमारी का जन्मदिन, जानें उनके बारे में खास बातें

आखिरकार फाइनल हुई प्रियंका चोपड़ा और निक जोनस की शादी की तारीख, जूता चुराई में इतने करोड़ लेंगी परिणिति

‘जंगली’ का टीज़र हुआ रिलीज, हाथियों के साथ मस्ती करते नजर आए विद्युत जामवाल

सिंगर सोना महापात्रा के बाद अब श्वेता पंडित ने अनु मलिक पर लगाया सेक्शुअल हैरेसमेंट का आरोप

पहली बार एक साथ डांस करते नजर आए अमिताभ बच्चन और आमिर खान, ‘ठग्स ऑफ हिंदोस्तान’ का पहला गाना ‘वशमल्ले’ हुआ रिलीज

#MeToo: के लपेटे में आए नंदिता दास के पद्मभूषण पिता जतिन दास, असिस्टेंट ने लगाया जबरदस्ती किस करने का आरोप

#MeToo के लपेटे में आए विक्की कौशल के पिता शाम कौशल, असिस्टेंट डायरेक्टर ने कहा- मुझे कमरे में बुलाकर पोर्न क्लिप दिखाई

2018-08-01_MeenaKumari.jpeg

बॉलीवुड की 'ट्रेजिडी क्वीन' कही जानी वाली बेहद खूबसूरत अदाकारा मीना कुमारी का आज जन्मदिन है. मीना कुमारी का जन्म 1 अगस्त 1933 को हुआ था. अपनी खूबसूरती और अदाकारी से मीना कुमारी लाखों दिलों पर राज करती थीं. न जाने कितने लोग उनकी एक झलक पाने को बेताब रहते थे. हर एक्टर और डायरेक्टेर उनकी अदाओं का कायल था. हर कोई उनके साथ काम करना और स्क्रीन शेयर करना चाहता था. मीना कुमारी ने छह साल की उम्र में अभिनय की दुनिया में कदम रख दिया था. उन्हों ने 1939 में पहली बार फिल्म निर्देशक विजय भट्ट की फिल्म "लैदरफेस" में बेबी महजबीं का रोल किया था. महजबीं बानो ही मीना कुमारी का असली नाम था. फिर 1940 में फिल्म 'एक ही भूल' में उन्होंने बेबी मीना का रोल किया था. 1946 में आई फिल्म बच्चों का खेल से बेबी मीना 13 साल की उम्र में मीना कुमारी बनीं और ये नाम उनका हमेशा के लिए हो गया.

एक जमाने तक हिंदी सिनेमा पर राज करने वाली मीना कुमारी जब पैदा हुई थीं तो उनके पिता अली बक़्श उन्हें पैदा होते ही अनाथाश्रम में छोड़ आए थे क्योंकि उनके पास डॉक्टर की फीस देने के लिए पैसे नहीं थे.अपने नवजात शिशु से दूर जाते-जाते पिता का दिल भर आया और तुरंत अनाथाश्रम वापस पहुंचे.

जब वह पहुंचे तो देखा कि नन्ही मीना के पूरे शरीर पर चीटियां काट रहीं थीं. अनाथाश्रम का दरवाज़ा बंद था, शायद अंदर सब सो गए थे. यह सब देख उस लाचार पिता की हिम्मत टूट गई उन्होंने बेटी को तुरंत गले लगा लिया. 1952 में फिल्म ‘बैजू बावरा’ से मीना कुमारी का कैरियर बुलंदियों पर पहुंचा. इसके बाद उन्हों ने लगातार कई शानदार फिल्में दी जिनमें दायरा, दो बीघा जमीन, एक ही रास्तां, जहां चांदनी चौक, आजाद, हलाकू, पाकीजा में उनके रोल की खूब चर्चा हुई. 31 मार्च 1972 को लंबी बीमारी के बाद मुंबई के सेंट एलिज़ाबेथ अस्पताल में उनका निधन हो गया.


 



loading...