लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद मायावती ने अखिलेश पर साधा निशाना, कहा- मुझे फोन तक नहीं किया

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बसपा सुप्रीमो मायावती ने लोकसभा चुनाव में मिली हार का ठीकरा सपा मुखिया अखिलेश यादव के सिर फोड़ा है. उन्होंने कहा कि अखिलेश नहीं चाहते थे कि मुसलमानों को ज्यादा टिकट दिए जाएं क्योंकि उनका मानना था कि इससे ध्रुवीकरण होगा. 

गठबंधन की हार के जिम्मेदार सपा नेताओं पर कार्रवाई न करने पर भी मायावती ने अखिलेश पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि प्रमोशन में आरक्षण का विरोध करने की वजह से दलितों व पिछड़ों ने सपा को वोट नहीं किया.  

मायावती ने बसपा प्रदेश मुख्यालय पर पार्टी के राष्ट्रीय सम्मेलन में यूपी में गठबंधन करने और उसके नतीजे के बाद की गतिविधियों पर जानकारी साझा की. मायावती ने कहा कि अब तक किसी भी गठबंधन से बसपा को कोई फायदा नहीं हुआ. इस चुनाव में भी यही स्थिति रही.

उन्होंने बताया कि गठबंधन के चुनाव हारने के बाद अखिलेश ने उन्हें फोन नहीं किया. पर, बड़े होने की वजह से मैंने उन्हें फोन किया और उनके परिवार के सदस्यों की हार पर सहानुभूति जताई. इसी तरह जब हमने उपचुनाव अकेले लड़ने की बात कही तो अखिलेश ने मुझे फोन नहीं किया. 

मायावती ने आरोप लगाया कि बसपा के प्रदेश अध्यक्ष आरएस कुशवाहा को सलेमपुर से सपा नेता राम गोविंद चौधरी ने उन्हें चुनाव हरवाया. उन्होंने सपा के वोट भाजपा को ट्रांसफर करवाए लेकिन सपा मुखिया ने उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की. 

आपको बता दें कि मायावती ने 3 जून को संकेत दिया था कि उपचुनाव में अलग-अलग चुनाव लड़ने के बावजूद सपा-बसपा गठबंधन के दरवाजे बंद नहीं होंगे. लेकिन रविवार को मायावती ने जिस तरह हार के लिए सपा मुखिया को दोषी ठहराया है, उससे गठबंधन के दरवाजे पूरी तरह बंद होते नजर दिखाई देते हैं.

मायावती ने आरोप लगाया कि ताज कॉरिडोर मामले में उनके खिलाफ भाजपा की साजिश में सपा के तत्कालीन प्रमुख मुलायम सिंह यादव भी शामिल थे. यही नहीं 2006 में जब बसपा संस्थापक कांशीराम जी की मृत्यु हुई तो केंद्र की कांग्रेस सरकार की तरह यूपी की मुलायम सिंह यादव सरकार ने न तो एक भी दिन का शोक घोषित किया और न ही दो फूल ही चढ़ाने पहुंचे.



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