आरक्षण की मांग को लेकर आज फिर महाराष्ट्र बंद, सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा- अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए कानून बनाए मोदी सरकार

मुंबई: छत्रपति शिवाजी एयरपोर्ट पर एयर इंडिया की एयर होस्टेस विमान से गिरी, हालत गंभीर

मुंबई: हाईकोर्ट ने सास-ससुर से गाली-गलौज करने वाली बहू को सुनाया घर से निकल जाने का आदेश

फैशन डिजाइनर सुनीता सिंह की हत्या के मामले में बेटे ने किया खुलासा, कहा- पिता की आत्मा से प्रभावित थी मां

महाराष्ट्र के नासिक में पत्नियों से परेशान होकर 100 पतियों ने उनके जिन्दा होने पर ही कराया पिंडदान, सरकार से की यह मांग

भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में सुप्रीमकोर्ट ने 19 सितंबर तक बढ़ाई आरोपी कार्यकर्ताओं की नजरबंदी

2018-08-09_MaharashtraBand.jpg

सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण की मांग को लेकर मराठा संगठनों द्वारा आज बुलाये गये महाराष्ट्र बंद के मद्देनजर व्यापक सुरक्षा इंतजाम किये गये हैं. मराठा संगठनों के विरोध प्रदर्शन के चलते पिछले महीने राज्य के विभिन्न हिस्सों में बड़े पैमाने पर हिंसा और आगजनी हुई थी. एक अधिकारी ने बताया कि सरकार ने बंद के मद्देनजर संवेदनशील स्थानों पर त्वरित कार्यबल की छह कंपनियां और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षाबल तथा राज्य रिजर्व पुलिस बल की एक-एक कंपनी तैनात की है. 

उन्होंने बताया कि विभिन्न स्थानों पर पुलिस की मदद के लिए होमगार्ड के जवान भी तैनात किये जा रहे हैं. पुलिस ने कार्यकर्ताओं से शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने और कानून व्यवस्था को हाथ में न लेने की अपील की है. पुलिस सोशल मीडिया पर भी नजर रख रही है.

राज्य के मुख्य सचिव डी के जैन ने बंद से पहले सुरक्षा उपायों की समीक्षा की. उन्होंने अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि उपनगरीय रेल सेवा सुचारु ढंग से चले तथा स्कूल एवं अन्य सेवाएं प्रभावित न हों.

इससे पहले मराठा आरक्षण को लेकर जारी खुदकुशी पर चिंता व्यक्त करते हुए बांबे हाईकोर्ट ने कहा था कि मराठा समुदाय के लोग धैर्य रखें. न तो हिंसक गतिविधियों में शामिल हों और न ही आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम उठाएं. क्योंकि, मामला अभी अदालत में न्यायालय में विचाराधीन है. वहीं, राज्य सरकार से आरक्षण की दिशा में उठाए गए कदमों की प्रगति रिपोर्ट 10 सितंबर तक पेश करने का निर्देश दिया है.

हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति आरवी मोरे व न्यायमूर्ति अनूजा प्रभुदेसाई की खंडपीठ ने कहा कि मराठा आरक्षण को लेकर शुरू आंदोलन की संवेदनशीलता को देखते हुए राज्य पिछड़ा आयोग जल्द से मराठा आरक्षण से जड़ी अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपे. सरकार का इस रिपोर्ट पर निर्णय लेना वैधानिक दायित्व है. हम आयोग से आशा व अपेक्षा रखते है कि वह अपना काम दो महीने में पूरा कर लेगा.



loading...