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मॉब लिचिंग को लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सख्त हैं. पश्चिम बंगाल सरकार अब मॉब लिंचिंग की घटनाओं को रोकने के लिए अधिवेशन के तहत इस पर कानून लाने जा रही है. माना जा रहा है कि 30 अगस्त को इस बिल को विधानसभा में पेश किया किया जाएगा.

बंगाल सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री ने बताया, "बिल का मुख्य उद्देश्य कमजोर लोगों को संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना और मॉब लिचिंग की घटनाओं पर रोक लगाना है. इसमें अपराध में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रस्ताव किया गया है."

मंत्री ने आगे बताया, "बिल के मुताबिक, डीजीपी एक को-ऑर्डिनेटर नियुक्त करेंगे जो मॉब लिचिंग की घटनाओं की निगरानी करने और उनको रोकने के लिए नोडल अधिकारी के रूप में कार्य करेंगे."

बिल में यह प्रावधान किया गया है 

1. मॉब लिचिंग में किसी को घायल किया तो दोष सिद्ध होने पर आरोपी को 3 साल तक जेल और एक लाख तक जुर्माना.

2. बुरी तरह घायल करने पर 10 साल तक जेल और 3 लाख तक जुर्माना.

3. हत्या होने पर दोषियों को उम्रकैद और 1 से 5 लाख तक का जुर्माना.

17 जुलाई 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्य को मॉब लिंचिंग पर अपना कानून बनाने को कहा गया था. बीते 5 अगस्त को राजस्थान लिंचिंग से संरक्षण विधेयक पारित किया था जिसके मुताबिक, मॉब लिंचिंग में मौत होने पर दोषियों को आजीवन कठोर कारावास और एक से पांच लाख तक का जुर्माने का दंड दिया जाएगा. मॉब लीचिंग में पीड़ित को घायल करने वालों को सात साल तक की सजा, एक लाख रुपए तक का जुर्माने का प्रावधान विधेयक में किया है. लिचिंग में पीड़ित के गंभीर रूप से घायल होने पर 10 साल तक की कैद और 50 हजार से 3 लाख तक का जुर्माना होगा.अब पश्चिम बंगाल सरकार भी इस पर क़ानून लाने जा रही है.



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