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मध्यप्रदेश में नाबालिगों से बलात्कार के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं. पिछले दिनों मंदसौर से 7 साल की बच्ची के साथ दिल दहला देने वाली घटना का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ कि सतना से 4 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म का मामला सामने आया है. इसके बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भारत के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा को पत्र लिखकर फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने और ऐसे मामलों को जल्द से जल्द निपटाने की मांग की है.

चौहान ने पत्र लिखकर कहा है कि बलात्कार जैसे मामलों ने आम आदमी को हिला कर रख दिया है. ऐसे मामलों में गंभीर सजा दिए जाने की जरूरत है और तेजी से निपटारे के लिए उच्च न्यायालयों को फास्ट ट्रैक की स्थापना कर मामलों की तेजी से सुनवाई करने की जरूरत है. उन्होंने सीजेआई से गुजारिश की है कि ऐसे मामलों को उच्च प्राथमिकता प्रदान किए जाने की जरूरत है.

इससे पहले 26 नवंबर 2017 को मध्यप्रदेश कैबिनेट ने बच्ची से रेप के मामले में एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पास किया. जिसके तहत 12 साल से कम उम्र की बच्ची के साथ रेप करने का दोषी पाए जाने पर गुनहगारों को मौत की सजा दिए जाने की घोषणा भी की. रेप के मामलों में इस तरह का सख्त कानून बनाने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बन गया लेकिन फिर भी वहां रेप के मामले थमने का नाम नहीं ले रहा है. 

वहीं अगर सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो मध्यप्रदेश बच्चियों और औरतों से बलात्कार के मामले में देश में पहले नंबर पर है. पिछले साल मध्यप्रदेश में 2,467 बच्चियों के साथ रेप की घटनाएं दर्ज हुईं, जो की देशभर में बच्चियों के साथ हुई रेप की वारदातों की कुल संख्या का आधा है. इनमें से 90 फीसदी मामलों में परिवार का कोई सदस्य या फिर कोई नजदीकी वारदात का आरोपी था.

राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट के मुताबिक मध्यप्रदेश सिर्फ बलात्कार के मामलों में आगे होने के लिए कुख्यात नहीं है, बल्कि कथित तौर पर नाबालिगों द्वारा किए गए रेप के मामलों में भी सबसे आगे है. साल 2016 में नाबालिगों के खिलाफ मध्यप्रदेश में 442 रेप केस दर्ज किए गए, जबकि महाराष्ट्र में 258 और राजस्थान में 159 रेप केस दर्ज हुए. 

अभी तक प्रदेश महिलाओं के लिए असुरक्षित था लेकिन अब यह बच्चियों के लिए काल बनता जा रहा है. बच्चियां कितनी असुरक्षित हैं इस तथ्य को आंकड़े बयां करते हैं. मध्यप्रदेश में पिछले साल रोजाना कम से कम 37 बच्चे भयंकर अपराधों के शिकार बने.



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