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एम नागेश्वर राव ने शुक्रवार को केंद्रीय अन्‍वेषण ब्‍यूरो (सीबीआई) के अंतरिम निदेशक का पद संभाल लिया है. उन्‍होंने पदभार संभालने के बाद पूर्व निदेशक आलोक वर्मा की ओर जारी किए गए सभी ट्रांसफर आदेशों को रद्द कर दिया है. अंतरिम सीबीआई निदेशक एम नागेश्वर राव ने सीबीआई के प्रमुख के रूप में अपने दो दिन के कार्यकाल में आलोक वर्मा द्वारा किए गए तबादलों संबंधी फैसले को रद्द कर दिया और अधिकारियों की आठ जनवरी वाली स्थिति बहाल कर दी.

सुप्रीम कोर्ट ने आलोक वर्मा को जबरन छुट्टी पर भेजे जाने के आदेश को मंगलवार को रद्द कर दिया था. इसके बाद वर्मा ने राव द्वारा किए गए सभी तबादले रद्द कर दिए थे. उन्होंने विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ मामले की जांच के लिए एक नया जांच अधिकारी भी नियुक्त किया था.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, न्यायमूर्ति एके सीकरी और लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे की सदस्यता वाली उच्चाधिकार प्राप्त समिति ने वर्मा का सीबीआई से गुरुवार को तबादला कर दिया था. सरकार ने अतिरिक्त निदेशक नागेश्वर राव को एजेंसी का प्रभार सौंपा. वर्मा और अस्थाना को जबरन छुट्टी पर भेजे जाने के दौरान भी राव ने 77 दिनों तक प्रभार संभाला था.

सुप्रीम कोर्ट ने राव को कोई भी बड़ा नीतिगत निर्णय से रोक दिया था लेकिन इस बार उनके कार्यकाल में ऐसी कोई शर्त नहीं है. एक सीबीआई प्रवक्ता ने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि राव ने गुरुवार नौ बजे एजेंसी का कार्यभार संभाला. 

वहीं सीबीआई के निदेशक पद से हटाए जाने के बाद पहली बार आलोक वर्मा ने सफाई दी है. उन्‍होंने कहा 'मैंने सीबीआई की साख बनाए रखने की कोशिश की. मुझे झूठे आरोपों के आधार पर पद से हटाया गया है.' उन्‍होंने यह भी कहा कि सीबीआई को बिना बाहरी दखल के काम करना चाहिए. सीबीआई की साख बर्बाद करने की कोशिश की गई है.



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