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जीवन-शैली

तो इस वजह से एक लड़का और लड़की कभी दोस्त नहीं हो सकते

आपने अक्सर कई लोगों को कहते सुना होगा की एक लड़का और लड़की कभी दोस्त नहीं हो सकते. लेकिन आप कई बार इस बात से सहमत नहीं होते होंगे. मगर एक हालिया अध्ययन में यह बात साबित भी की गई है कि एक लड़का और लड़की कभी दोस्त नहीं हो सकते. यह अध्ययन ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में किया गया है.

अंगूर खाने के 8 बेमिसाल फायदे

इन दिनों अंगूर का मौसम है। बाज़ार में आसानी से काफी सस्ते दामों में अंगूर मिल जाते हैं। अंगूर एक रसीला फल है जो ज़्यादातर लोगों को पसंद होता है। अंगूर की सबसे अच्छी बात ये है कि दूसरे फलों की तरह इसे काटने और छीलने का झंझट नहीं होगा। आमतौर पर दो तरह के अंगूर भारत में मिलते हैं

कई बीमारियों में लाभकारी है तुलसी, जानें फायदे

तुलसी की पूजा की जाती है इसे सुख और कल्याण के तौर पर देखा जाता है लेकिन पौराणिक महत्व से अलग तुलसी एक जानी-मानी औषधि भी है, जिसका इस्तेमाल कई बीमारियों में किया जाता है. सर्दी-खांसी से लेकर कई बड़ी और भयंकर बीमारियों में भी एक कारगर औषधि है. आयुर्वेद में तुलसी के पौध

सर्दियों में रोज करें संतरों का सेवन, होंगे कई फायदे

सर्दियों में संतरा सबसे अधिक फायदेमंद फल होता है. संतरे में विटामिन सी प्रचूर मात्रा में होती है. जो सेहत पर बेहद सकारात्मक प्रभाव डालती है. जानकारी के मुताबिक, जिन लोगों को हाई ब्लडप्रेशर की समस्या रहती है, उन्हें इसका सेवन जरूर करना चाहिए. इसमें पोटेशियम और मैग्नेश

अंडे खाने से बनती है सेक्स लाइफ दुरुस्त

सण्डे हो या मण्डे रोज खाओ अंडे का स्लॉगन काफी चर्चित है. लेकिन अगर आप इस स्लॉगन के जरिए कही बात को अपनाते है तो आपको बहुत लाभ मिलेगा. बता दें कि अंडा ना केवल स्वास्थ्य के लिए अच्छा है बल्कि यौनेच्छा बढ़ाने के लिए भी इसके अनोखे फायदे हैं. अंडे में पाया मौजूद विटाम

सेहत के लिए बहुत लाभदायक है केला, रोज करें सेवन

केला हमारी सेहत के लिखे बेहद ही फायदेमंद फल है. अगर आप इसका नियमित सेवन करते हैं तो आप कई बीमारियों से दूर रहेंगे. इसमें मौजूद विटामिन बी, विटामिन सी कोशिकाओं को पोषण देने का काम करता है. कच्चे केले में सेहतमंद स्टार्च होता है और साथ ही एंटी-ऑक्सीडेंट्स भी. 1

खूबसूरती बढ़ाने के लिए एलोवेरा का करें उपयोग

भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग प्राकृतिक संसाधनों को पीछे छोड़ते जा रहे हैं और भौतिक संसाधनों को अपना रहे हैं. जिसके फायदे बहुत कम समय के लिए ही होते हैं. हम आज आपको एलोवेरा के गुणों से परिचित करायेंगे है. जो प्राकृतिक गुणों का भंड़ार है. जिसके कोई साइड इफेक्ट नहीं हैं और शरीर को

स्वाद के साथ यौन इच्छा भी बढ़ाते हैं मेथी के दाने

सब्जी का स्वाद बढ़ाने के लिए कई तरह के मसालों का प्रयोग होता है जिसमें मेथी भी बहुत जरुरी है। यदि आप मसाले के तौर पर मेथी प्रयोग करते है तो ये किसी प्राकृतिक औषधि से कम नहीं है। जानिए मेथी के दानों के प्रयोग से क्या हैं फायदे? 1. बवासीर के रोगियों के लिए मेथी ल

छोड़ दें नाख़ून चबाना, हो सकते हो बीमारियों के शिकार

कई लोग जब कुछ सोच रहे होते हैं तो अक्सर अपने नाखून चबाने लगते हैं. वहीं, कुछ खाली वक्त में ऐसा करते हैं तो कुछ घबराहट के कारण नाखून चबाने लगते हैं. लेकिन ये आदत उनके लिए मुश्किल भी खड़ी कर सकती है. मुंह के संपर्क में आते ही नाखूनों की गंदगी लार में मिल जाती है, जिससे

Valentine Spl : लड़की को प्रपोज करते वक्त रखें इन बातों का खास ध्यान

वैलेंटाइन डे का कुछ लोग बेसब्री से इंतजार करते हैं, इस दिन को प्यार का इजहार करने के लिए सबसे अच्छा माना जाता हैं. इस दिन कई नए कपल्स बनते हैं तो पुरानों का भी प्यार परवान चढ़ता है. अगर आप इस दिन अपने प्यार का इजहार करने जा रहे हैं तो इन बातों का विशेष ध्यान रखें. सब

किसी दूसरे का फोन इस्तेमाल करने से पड़ सकते हो बीमार, जानें कैसे

हमारे स्मार्टफोन का कैमरा अच्छा नहीं है तो हम किसी दूसरे का फोन इस्तेमाल करने से नहीं शरमाते, लेकिन हाल में स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय ने सूचित किया है कि एक ही मोबाइल फोन का इस्तेमाल कई लोगों द्वारा किए जाने से इंफेक्शन फैल सकता है. जानकारी के मुताबिक, 1 ही मोबाइल क

ऐसे बढ़ती उम्र में दिख सकते हैं जवान

बढ़ती उम्र महिलाओं को बेहद ही बेकार लगती है, इसलिए किसी भी महिला से उसकी उम्र नहीं पूंछनी चाहिए. महिलाएं अपना बुढ़ापा रोकने के लिए तरह-तरह की क्रीम, आयुर्वेदिक लेप का उपयोग करती हैं. वहीं, कहीं महिलाएं ब्यूटीशियनों पर मोटी रकम खर्च कर देती हैं, लेकिन घर बैठे भी व्यायाम करके महिल

जूते उतारने पर आती है बदबू, तो अपनाएं ये आसान से घरेलू नुस्खे

अकसर जो लोग लंबे समय तक जूते पहने रखते हैं या जिनके पैरों में अत्यधिक पसीना आता है उन्हें इस जूतों की बदबू की परेशानी का सामना करना पड़ता है। जूतों की बदबू की समस्या से छुटकारा पाने के लिए इसके कारणों को जानना जरूरी है। अगर आप लंबे समय तक जूते पहने रहते हैं, तो गर्मी और न


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  • अगर सुनार के धोखे से बचना है तो जाने क्या होती है 'एक्साइज ड्यूटी' (ED) ?

    मान लीजिये आप सुनार के पास गए आपने 10 ग्राम प्योर सोना 30000 रुपये का खरीदा. उस सोने को लेकर आप सुनार के पास हार बनवाने गए. सुनार ने आपसे 10 ग्राम सोना लिया और कहा की 2000 रुपये बनवाई लगेगी. आपने खुशी से कहा ठीक है. उसके बाद सुनार ने 1 ग्राम सोना निकाल लिया और 1 ग्राम का टांका लगा दिया. बिना टांके के आपका हार बन ही नहीं सकता ये तो सभी जानते हैं. 

    यानी अगर 1 ग्राम सोना 3000 रुपये का निकाल लिया और 2000 रुपये आपसे बनवाई अलग से लेली. तो सीधा-सीधा आपको 5000 रुपये का झटका लग गया. अब आपके 30 हजार रुपये सोने की कीमत मात्र 25 हजार रुपये बची और सोना भी 1 ग्राम कम होकर 9 ग्राम शेष बचा.  

    बात यहीं खत्म नहीं हुई. उसके बाद अगर आप पुन: अपने सोने के हार को बेचने या उसी सोने से कोई और आभूषण बनवाने पुन: उसी सुनार के पास जाते हैं तो वह पहले टांका काटने की बात करता है और सफाई करने के नाम पर 0.5 ग्राम सोना और कम हो जाता है

    अब आपके पास मात्र 8.5 ग्राम सोना ही बचता है. यानी कि 30 हजार का सोना अब बस 23500 रुपये का बचा.

    आप जानते होंगे कि,

    30000 रुपये का सोना + 2000 रुपये बनवाई = 32000 रुपये.

    1 ग्राम का टांका कटा 3000 रुपए + 0.5 ग्राम पुन: बेचने या तुड़वाने पर कटा मतलब सफाई के नाम पर = 1500 रुपये.

    शेष बचा सोना 8.5 ग्राम

    यानी कीमत 32000 - 6500 का घाटा = 25500 रुपये.

    यह वो था जो अब तक होता आया है. लेकिन इसके विपरीत भारत सरकार की मंशा क्या है? एक नज़र डालते हैं इस पर भी.

    एक्साइज ड्यूटी लगने पर सुनार को रसीद के आधार पर उपभोक्ता को पूरा सोना देना होगा. इतना ही नहीं जितने ग्राम का टांका लगेगा उसका सोने के तोल पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा.

    जैसा कि आपके सोने का तोल 10 ग्राम है और टांका 1 ग्राम का लगा, तो सुनार को रसीद के आधार पर 11 ग्राम वजन करके उपभोक्ता को देना होगा. इससे उपभोक्ता को फायेदा होगा और सुनार अब तक जो प्रपंच करते आयें हैं उस पर लगाम लग सकेगी. इसीलिए सुनार हड़ताल पर है कि अब उनका धोखाधड़ी का भेद खुल जायेगा.
     

  • स्वयं के उत्थान के लिए भाषा का विकास सबसे ज़रूरी : राज महाजन

    कहते हैं जिसने अपनी मातृभाषा में पकड़ मजबूत करली वही इंसान जीवन में सफल है और मातृभाषा के उत्थान के लिए हमें ही कदम उठाने पड़ेंगे. 14 सितंबर को हर साल हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है. हिंदी को राजभाषा का दर्जा हासिल है और हिंदी भारत में बोलचाल के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली भाषा है. 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा में हिंदी को राजभाषा के रूप में अंगीकार किया गया था. हिंदी के महत्व को बताने और इसके प्रचार प्रसार के लिए राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के अनुरोध पर 1953 से हर साल 14 सितंबर को हिंदी दिवस के तौर पर मनाया जाता है. 

    1918 में हिन्दी साहित्य सम्मेलन में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी हिंदी को जनमानस की भाषा बताया था. साल 1949 में स्वतन्त्र भारत की राजभाषा के प्रश्न पर 14 सितंबर 1949 को काफी विचार-विमर्श के बाद यह निर्णय लिया गया जिसे भारतीय संविधान के भाग 17 के अध्याय की धारा 343(1) में बताया गया है कि ‘संघ की राज-भाषा हिन्दी और लिपि देवनागरी होगी. यह निर्णय 14 सितंबर को लिया गया था. इसी वजह से इस दिन को हिन्दी दिवस के रूप में घोषित कर दिया गया. लेकिन जब राजभाषा के रूप में हिंदी लागू की गई तो गैर-हिन्दी भाषी राज्य के लोगों के बीच से विरोध के सुर भी उठने लगे और फिर अंग्रेजी को भी राजभाषा का दर्जा देना पड़ा. यही कारण रहा है कि हिन्दी में भी अंग्रेजी भाषा का प्रभाव पड़ने लगा.

    आज पूरा विश्व ग्लोबल हो गया है. इस दौर में भाषा ने भी अपना रूप बदल लिया है. हिंदी की जगह अंग्रेजी हो गया है. मज़े की बात है जिसे हिंदी नहीं बोलनी आती उसे भी अच्छी नौकरी मिलती है क्यूंकि उसे अंग्रेजी बोलनी आती है. हिंदी आये या न आये, लेकिन “इंग्लिश” आनी ज़रूरी है. अपनी ही भाषा का अपने ही देश में इस तरह से ह्रास होना निंदनीय है.

    1991 के बाद भारत में नव-उदारीकरण की आर्थिक नीतियां लागू की गई. नई प्रौद्योगिकी और इससे उपजते हुये सेवा और उद्योग देश की अर्थ, नीति में कई सारे महत्वपूर्ण बदलाव हुए. इस बदलाव का भाषा पर भी जबरदस्त असर पड़ा. अंग्रेजी के अलावा किसी दूसरे भाषा की पढ़ाई को समय की बर्बादी समझा जाने लगा. जब हिन्दी भाषी घरों में बच्चे हिन्दी बोलने से कतराने लगे, या अशुद्ध बोलने लगे तब कुछ विवेकी अभिभावकों के समुदाय को एहसास होने लगा कि घर-परिवार में नई पीढ़ियों की जुबान से मातृभाषा उजड़ने लगी है. इसलिए हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए राजभाषा सप्ताह या हिंदी पखवाड़ा मनाया जाने लगा. इस पूरे सप्ताह सरकारी विभागों और विद्यालयों में अलग-अलग प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है ताकि हिंदी को बढ़ावा दिया जा सके और ज़्यादा लोग इसका प्रयोग उतने ही स्वाभिमान से करे जैसे इंग्लिश का करते हैं. 

    आज सभी जगहों पर इंग्लिश के साथ-साथ हिंदी का चलन भी बढ़ा है. लेकिन नई पीढ़ी कहीं इससे पूरी तरह से वंचित न रह जाए इसलिए समाज का बुद्धिजीवी वर्ग इसके लिए प्रयास कर रहा है. हर तबका अपने-अपने हिसाब से हिंदी का उत्थान करने का प्रयास कर रहा है. कवि अपनी कविताओं के ज़रिये, साहित्यकार अपने साहित्य के ज़रिये, शिक्षक अपनी विद्या के ज़रिये और घर में माता-पिता अपने संस्कारों के ज़रिये. ऐसा ही एक छोटा सा प्रयास मैंने भी किया है और आगे भी करता रहूँगा. मैं राज महाजन अपने तरीके से हिंदी के उत्थान में जुड़ा हूँ. हो सकता है मेरा करना काफी नहीं होगा. लेकिन मैंने अपने ही बूते पर एक शुरुआत की है जिससे मैं आने वाली पीढ़ी को हिंदी का महत्व समझा सकूँ. मेरा मानना है अगर समाज को उन्नत और उत्कृष्ट बनाना है तो पहले अपनी जड़ों को मजबूत और संमृद्ध बनाना होगा. इसके लिए भाषा को पतन से बचाना होगा. ज़रूरी नहीं कि उत्थान तभी होगा जब हम रोज हिंदी बोलेंगे. उत्थान तब होगा जब हिंदी बोलने पर शर्म महसूस नहीं करेंगे. पूरी आत्मीयता से हिंदी को अपनाएंगे, हिंदुत्व का विकास हिंदी से ही होगा. आज हिंदी दिवस पर मैं सभी को इस ओर प्रेरित करता हूँ और आने वाली पीढ़ी से एक 
    गुज़ारिश करता हूँ कि अंग्रेजी का प्रयोग तो करें लेकिन अपनी जड़ों को न भूलें जिनमें  हिन्द और हिंदी समाई है. हिंदी से जुड़ना मेरे लिए गौरव का विषय है.    

  • श्रद्धा और उल्लास का प्रतीक है जन्माष्टमी

    आज है गोकुल के नटखट ग्वाले कृष्ण का जन्मदिन यानि “जन्माष्टमी”. कहते हैं जब नन्हे कान्हा ने मामा कंस के  कारागार में जन्म लिया था तब वहां मौजूद सभी पहरेदारों को निद्रा ने अपने वश में कर लिया था. उनके जन्म लेते ही उस कारागार में एक आलौकिक प्रकाश पुंज छा गया था जिससे सभी की आँखे कुछ पलों के लिए चुंधिया गईं थीं. नन्हे कान्हा के तेज के आगे समस्त भू लोक नमन करने लगा था. जैसे-जैसे कान्हा बढ़े होते गए वैसे-वैसे उनकी लीलाएं भी बढ़ती चली गई. जब-जब उनके भक्तों को उनकी आवश्यकता पड़ी, तब-तब भगवान कृष्ण ने सहारा दिया. कभी द्रौपदी का भाई बनकर, कभी अर्जुन का सखा बनकर, कभी सुदामा से अपनी मित्रता निभाकर, कभी डूबते का सहारा बनकर, कभी गोवर्धन उठाकर भक्तों का तारक बनकर, तो कभी कर्तव्य का मोल बताने के लिए महाभारत के युद्ध का आगाज़ कराकर. एक वही इस समस्त जगत में हर रूप में, कण-कण में विद्यमान है. आज का दिन उन्हीं की भक्ति में रमने का है. "गोविन्द मेरो है गोपाल मेरो है, समस्त जगत में इक तू ही मेरो है”  

    भगवान श्रीकृष्ण विष्णु जी के ही अवतार हैं जिन्हें सोलह कलाएं प्राप्त हैं. उन्होंने ही प्राणीमात्र को संदेश दिया कि फल की इच्छा रखना व्यर्थ है सिर्फ कर्म ही मनुष्य का अधिकार है. जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण का जनमोत्स्व और मैं राज महाजन इस पावन पर्व पर कुछ कहना चाहता हूँ जन्माष्टमी की रात्रि को मोह-रात्रि भी कहा गया है क्यूंकि इस रात्रि में मनुष्य मोह-माया के बंधन से मुक्त हो जाता है. ऐसी मान्यता है जन्माष्टमी के दिन व्रत-उपवास रखने से हर मनोकामना पूरी होती है. बाल गोपाल के जन्म से समस्त संसार तर गया था. भगवान श्री कृष्ण ने कर्म को प्रधान कहा था लेकिन आज कलियुगी युग में कर्म की प्रधानता कहीं खो सी गई है, इसलिए भी जन्माष्टमी का महत्व यहाँ और भी ज़्यादा बढ़ गया है. मेरा भी मानना यही है कि कर्महीन मनुष्य को फल की इच्छा नहीं करनी चाहिए. तो आईये नन्हे गोपाल की भक्ति में आज का यह शुभ दिन अर्पण करदें. सर्वगुण संपन्न मोहन की भक्ति कीजिये क्यूंकि भक्ति में ही शक्ति है. बाल गोपाल को अपने मन में बिठाईये और इस जगतमय बंधन से मुक्त हो जाईए. श्रद्धा और उल्लास से भरे इस पर्व का आनंद उठाईये. एक बार फिर मेरी यानि राज महाजन की तरफ़ से इस पावन पर्व की हार्दिक बधाई.