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जानें भगवान शिव को श्रावण मास क्यों है इतना प्रिय

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श्रावण मास शिव भगवान को बहुत प्रिय है. इस मास में शिव का अभिषेक करने से शिव सभी की मनोकामनाएं पूरी कर देते हैं. इस मास में शिव का रूद्र नाम भी बहुत प्रचलित है. इसके आलावा शिव जी को पशुपति, भव, शर्व, उग्र, महादेव, और ईशान नाम भी कहा जाता है. यह भी पढ़ें: सावन में ऐसे करें शिव की पूजा, तो पूरी होगी हर मुराद

श्रावण में ही हजारों भक्त कांवड़ लेकर गंगा नदी की ओर जाते हैं. क्योंकि कहा जाता है कि पवित्र नदियों के जल से शिव को अभिषेक कराने से, शिव जी बेहद प्रसन्न हो जाते हैं. वैसे देखा जाए तो श्रावण वर्षा-ऋतु का महीना है. इस मास में श्री हरि जब शयन कर रहे होते हैं, तब सन्यासी एक जगह पर नारायण, शिव और अन्य देवी-देवताओं की कथा द्वारा नागरिकों का मार्गदर्शन कर रहे होते हैं. यह भी पढ़ें: सावन में भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए करें ये उपाय

श्रावण मास में ही कई पवित्र त्योहार आते हैं, जैसे – रक्षाबंधन, नागपंचमी, हरियाली तीज आदि. समुद्र मंथन भी इसी मास में हुआ था. कहा जाता है कि उससे निकला विष शंकर ने कंठ में समाहित कर लिया था और सृष्टि की रक्षा की थी. विष के परिणाम को कम करने के लिए सभी देवी-देवताओं ने उन्हें जल अर्पित किया था. इसीलिए श्रावण मास में ही शिव को जल चढाने से विशेष फल की प्राप्ति होती है. वहीं शिव पुराण में लिखा है कि भगवान शिव स्वयं ही जल हैं. श्रावण मास में भगवान शिव की पूजा उनके परिवार के सदस्यों विशेषकर गणेश को प्रसन्न करने के लिए करनी चाहिए. यह भी पढ़ें: जानिए सावन के सोमवार की व्रत विधि, महत्व और पुण्य फल

श्रावण मास में रुदाभिषेक का एक अलग ही महत्व है. विशेष लाभ के लिए हर दिन रुद्राभिषेक किया जा सकता है. रुद्राभिषेक में जल, दूध, घी, दही, शहद, गंगाजल, गन्ने का रस, शक्कर, मिश्री, आदि से स्नान कराया जाता है. अभिषेक कराने के बाद बेलपत्र, शमीपत्र, आक, तुलसी, नीलकमल आदि अर्पित करना चाहिए, क्योंकि शिव इससे बेहद प्रसन्न होते हैं. भांग, धतूरा भी शिव जी को बहुत पसंद है.      
 



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