कृष्ण जन्माष्टमी मतांतर के चलते मनाई जाएगी, इस बार तीन दिन

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इस बार भगवान कृष्ण के जन्म का पर्व कृष्ण जन्माष्टमी तिथि, मत और नक्षत्र के आधार तीन दिन मनाई जाएगी। इसके चलते स्मार्त, वैष्णव और रामानुज संप्रदाय के मंदिर में अलग-अलग दिन यशोदा नंदन की जन्म आरती होगी। लेकिन इस बार पर्व 14,15 और 16 अगस्त को मनाया जाएगा।

ज्योर्तिविद् श्यामजी बापू ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार भगवान कृष्ण का जन्म द्वापर युग में भाद्रपद की कृष्ण अष्टमी पर मध्यरात्रि को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इस बार अष्टमी तिथि और नक्षत्र अलग-अलग दिन आने से यह स्थिति उत्पन्न हुई है।

अष्टमी तिथि इस बार 14 अगस्त को शाम 7.40 बजे से 15 अगस्त को शाम 5.39 बजे तक रहेगी। इसके चलते स्मार्त मत वाले 14 अगस्त को जन्म अष्टमी मनाएंगे. इसके विपरीत उदयाकाल में अष्टमी तिथि 15 को रहेगी, इस कारण वैष्णवमत वाले मंदिर में 15 अगस्त को भगवान की जन्म आरती करेंगे. रामानुज संप्रदाय के मंदिर में नक्षत्र के आधार पर पर्व मनाने की परंपरा है।

रोहिणी नक्षत्र 15 अगस्त को रात 2.30 मिनिट से लगेगा जो 16 अगस्त को रात 12.49 बजे तक रहेगा। इसके चलते रामानुज संप्रदाय के मंदिर में 16 अगस्त को कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाएगी। पं. ओम वशिष्ठ ने बताया कि 15 अगस्त पर कृष्ण जन्माष्टमी 30 साल बाद आई है। इस दिन मध्यरात्रि के समय नवमी तिथि और कृतिका नक्षत्र के साथ दिवस पर्यंत सवार्थ सिद्धि योग रहेगा।

किस मंदिर में किस दिन मनेगी जन्माष्टमी

स्मार्त मत : राजवाड़ा स्थित गोपाल और बांके बिहारी मंदिर में 14 अगस्त को जन्म आरती होगी।

वैष्णव मत : यशोदामाता मंदिर, इस्कॉन मंदिर, गीता भवन में 15 अगस्त को जन्माष्टमी मनाई जाएगी।

रामानुज संप्रदाय : छत्री बाग स्थित लक्षमी वेंकटेश मंदिर, गुमाश्ता नगर स्थित तिरुपति बालाजी और विद्या पैलेस स्थित पदमावती वेंकटेश देवस्थान पर 16 अगस्त को भगवान के जन्म का पर्व मनाया जाएगा।



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