आज है गुरु पूर्णिमा, जानिए- क्या है इसका महत्व, यह उपाय दिलाएंगे कष्टों से मिलेगी मुक्ति

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आज आषाढ़ मास का पूर्णिमा है. इस दिन गुरु पूर्णिमा मनाने का विधान है. हमारे समाज में गुरु का स्थान हमेशा ही सर्वोच्च रहा है, उन्हें ईश्वर के समान माना गया है. गुरु को ब्रह्मा, विष्णु और महेश का रूप माना जाता है. आषाढ़ पूर्णिमा या गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु की पूजा की जाती है और उन्हें सम्मान दिया जाता है.

ऋषि पराशारा और सत्यवती के पुत्र और महाभारत, वेद, उपनिषद और पुराणों के रचयिता महर्षि वेद व्यास का जन्म आज ही के दिन हुआ था. इसलिए यह दिन उन्हें समर्पित है. वेद व्यास को समस्त मानव जाति का गुरु माना जाता है. महर्षि वेद व्यास का जन्म आषाढ़ पूर्णिमा के दिन ही हुआ है. आज से करीब 3000 ई. पूर्व जन्म लेने वाले महर्षि वेद व्यास ने वेदों, उपनिषदों और पुराणों की रचना की. इसलिए उन्हें समस्त मानव जाति का गुरु माना जाता है. इस दिन वेद व्यास जी की पूजा की जाती है और जिसे भी अपना गुरु मानते हैं उनकी पूजा करते हैं. आषाढ़ पूर्णिमा होने के कारण आज के दिन लोग व्रत भी रखते हैं.
26 जुलाई, 2018 को रात 11:16 pm बजे से पूर्णिमा तिथि शुरू हो चुकी है. जो 28 जुलाई 2018 को सुबह 1:50 am बजे समाप्त हो जाएगी.

गुरु पूजन का शुभ मुहूर्त-

27 जुलाई को चंद्रग्रहण भले ही रात में लग रहा है, लेकिन इसका सूतक दोपहर 2.54 बजे ही लग जाएगा. यानी आपको गुरु पूजन इससे पहले ही करना होगा.

इसके अलावा 27 जुलाई को सुबह 10:30 से दोपहर 12:00 तक राहुकाल है. राहुकाल के दौरान भी गुरु पूजन नहीं होगा. ऐसे में आप अपने गुरु की पूजा सुबह 5 बजे से लेकर सुबह 10:29 बजे तक और दोपहर 12:01 मिनट से 2:53 बजे तक कर सकते हैं.

गुरु पूजन विधि-

गुरु को भगवान का स्थान प्राप्त है. गुरु ब्रह्मा हैं, गुरु विष्णु हैं और गुरु ही भगवान शंकर हैं. गुरु ही ब्रह्मांड हैं. गुरु के पूजन की विधि भी भगवान के पूजन विधि जैसी ही है.

1. गुरु पूर्णिमा के दिन सुबह-सुबह उठकर घर की साफ सफाई कर लें और फिर स्नान कर साफ कपड़े पहनें.

2. घर के मंदिर में पटिए पर सफेद कपड़ा बिछाकर उस पर 12-12 रेखाएं बनाकर व्यास-पीठ बनाएं.

3. ऐसा करने के बाद दोनों हाथ जोड़कर ‘गुरुपरंपरासिद्धयर्थं व्यासपूजां करिष्ये’ मंत्र का उच्चारण करें. 

4. दसों दिशाओं में अक्षत (चावल) छोड़ें.

5. व्यासजी, ब्रह्माजी, शुकदेवजी, गोविंद स्वामीजी और शंकराचार्यजी के नाम से पूजा का आवाहन करें.

6. अंत में अपने गुरु अथवा उनके चित्र की पूजा करके उन्हें यथा योग्य दक्षिणा प्रदान करें.

गुरु पूर्णमा के दिन गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा का विधान है. वृन्दावन में इस दिन साधु सिर मुंडाकर गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा करते हैं. ब्रज में इसे मुड़िया पूनों नाम से भी जाना जाता है.



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