नोटबंदी का 1 साल : ब्लैकमनी पर नहीं पड़ा कोई खास असर, करप्शन पर लगी लगाम

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फाइनेंस मिनिस्‍टर अरुण जेटली ने खुद यह दावा कि नोटबंदी से इकोनॉमी फॉर्मल हुई है. देश कैशलेस इकोनॉमी की ओर तेजी से बढ़ा है और सिस्‍टम में ब्‍लैकमनी का फ्लो घटा है. वहीं, विपक्ष का दावा है कि नोटबंदी सबसे बड़ा घोटाला है और यह ब्‍लैकमनी को व्‍हाइट करने की बड़ी स्‍कीम साबित हुई. 

सीनियर इकोनॉमिस्‍ट एवं ब्‍लैक इकोनॉमी एक्‍सपर्ट अरुण कुमार ने बताया कि भारत की ब्‍लैक इकोनॉमी लगभग 300 से 400 लाख करोड़ रुपए की है. इसका एक फीसदी हिस्‍सा कैश है. यानी कि लगभग 3 से 4 लाख करोड़ रुपए और नोटबंदी के कारण केवल 1 फीसदी ब्‍लैक मनी खत्‍म हुई और 99 फीसदी जमा हो गई. इसका मतलब है कि ब्‍लैक मनी पर कोई फर्क नहीं पड़ा.

इकोनॉमिस्‍ट और पूर्व CSO प्रणब सेन ने बताया कि नोटबंदी के एक साल बाद टैक्‍सेशन बढ़ गया, इसका पता अभी नहीं चल पाया है. यहां तक कि इनकम टैक्‍स डिपार्टमेंट को भी इसका नहीं पता. इनकम टैक्‍स को यह जरूर पता करना चाहिए कि नोटबंदी के बाद टैक्‍स देने वालों की संख्‍या बढ़ी है या नहीं. अगर लोग अब भी टैक्‍स नहीं भर रहे हैं तो इसका मतलब है कि करप्‍शन कम करने में नोटबंदी से कोई खास फायदा नहीं मि‍लने वाला. 
 



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