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केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम से 175 किलोमीटर दूर स्थित है सबरीमाला मंदिर. पिछले महीने इस मंदिर के दरवाजे हर उम्र की महिलाओं के लिए खोलने का फैसला उच्चतम न्यायालय ने सुनाया था. सालों पुराने इस मंदिर में 10-50 साल की उम्र के बीच की महिलाओं के प्रवेश पर रोक है. न्यायालय के फैसले के बाद अय्प्पा भक्तों ने विरोध प्रदर्शन किया.

बुधवार को जब इस मंदिर के कपाट खुले तो इसी विरोध ने उग्र रूप धारण कर लिया. दर्शन करने जा रही महिला श्रद्धालुओं को प्रदर्शनकारियों ने रोक दिया. केवल इतना ही नहीं महिलाओं और महिला पत्रकारों पर हमला भी किया गया.

विरोध जताते हुए सबरीमाला संरक्षण समिति ने गुरुवार को राज्यभर में 12 घंटे बंद का आह्वान किया है. भाजपा, अतंरराष्ट्रीय हिंदू संगठन सहित अन्य संगठनों ने इस बंद को अपना समर्थन दिया है. वहीं निल्लकल, पंबा, एल्वाकुलम, सन्निधनम में धारा 144 लागू कर दी गई है. इन इलाकोंक्षेत्रों में चार से ज्यादा लोग एक साथ खड़े नहीं हो सकते.

यह बंद श्रद्धालुओं पर पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज के विरोध में बुलाया गया है. लगातार हो रहे विरोध की वजह से जहां सरकार को न्यायालय का आदेश लागू करने में मुश्किल हो रही है. वहीं बुधवार को केरल राज्य परिवहन की लगभग 10 बसों को प्रदर्शनकारियों ने आग के हवाले कर दिया गया था. इसी वजह से आज परिवहन सेवा ठप हैं. 

इसी बीच न्यूयॉर्क टाइम्स की एक महिला पत्रकार सुहासिनी राज मंदिर दर्शन के लिए पहुंची थीं. लेकिन वह बीच रास्ते से ही वापस आ गई हैं क्योंकि प्रदर्शनकारियों ने उन्हें रोक दिया. इस पर पुलिस का कहना है, जब वह माराकूट्टम पहुंची तो उन्होंने भीड़ को देखते हुए वापस आने का निर्णय लिया. पुलिस उन्हें ले जाने के लिए तैयार थी. इस मामले पर तिरुवनंतपुरम रेंज के आईजी ने कहा, हम वहां जाने वाले हर किसी शख्स को सुरक्षा देंगे. यह हमारा काम है कि हम हर श्रद्धालु को सुरक्षा देंगे. हमने ज्यादा सुरक्षाबल लगाए हैं और सभी रास्तों को सुरक्षित किया है. उन्हें वापस आने के लिए मजबूर नहीं किया गया.

सबरीमाला के प्रमुख पुजारी कंदारारु राजीवारु ने कहा, यह बहुत खतरनाक परिस्थिति है. उच्चतम न्यायालय के फैसले से बहुत से भक्त निराश हैं. मेरी आपसे गुजारिश है कि कृपया सबरीमाला मंदिर की व्यवस्था और प्रथा को बनाए रखें. मैं हिंसा से सहमत नहीं हूं. इसे भक्तों ने नहीं बल्कि किसी अन्य ने किया है. उच्चतम न्यायालय को केवल जमीन का अधिकार मालूम है. उसे प्रथा और परंपरा के बारे में नहीं पता है. इसी वजह से बहुत से भक्त चाहते हैं कि पुरानी प्रथा बनाई रखी जाए. मेरी केवल एक राय है जो पुरानी परंपरा और प्रथा पर आधारित है.

ऑल केरला ब्राह्मिन्स एसोसिएशन उच्चतम न्यायलय द्वारा पूर्व में दिए फैसले के खिलाफ याचिका दायर की है. याचिका में कहा गया है कि फैसले में गंभीर गलतियां हैं जिसके परिणामस्वरुप अयप्पा के असल भक्तों का न्याय पूरा नहीं हो पाया है.



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