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कर्नाटक संकट: विधानसभा स्पीकर बोले- आज शाम तक ही विश्वास मत होगी वोटिंग, सदन की गरिमा बनाए रखें

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विधानसभा स्पीकर केआर रमेश कुमार ने कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार को बहुमत साबित करने के लिए शाम 6 बजे तक का वक्त दिया है. कांग्रेस-जेडीएस ने इसके लिए हामी भी भर दी है. विधानसभा स्पीकर ने यह भी बताया कि 16 बागी विधायक अगर सदन नहीं पहुंचते हैं, तो उन्हें गैरहाजिर माना जाएगा. इस तरह देखें तो कुमारस्वामी सरकार के पास अब चंद घंटे ही बचे हैं. इसके बाद उनके भविष्य का फैसला हो जाएगा. वैसे भी फिलहाल जो सदन की संख्या गणित है, वह पूरी तरह से उनके खिलाफ है.

कर्नाटक की कुमारस्वामी सरकार से समर्थन वापस लेने वाले 2 निर्दलीय विधायक के आर शंकर और निर्दलीय एच नागेश की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट ने आज सुनवाई करने से इनकार कर दिया है. चीफ जस्टिस ने कहा कि कल सुनवाई की जा सकती है. दरअसल, अर्जी में कहा गया है कि बहुमत खो चुकी सरकार सदन में वोटिंग को टालने में लगी है, ऐसे में सुप्रीम कोर्ट तुरंत बहुमत परीक्षण का आदेश दे. इससे पहले राज्य कांग्रेस अध्यक्ष दिनेश गुंडू राव और  मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने अर्जी दायर कर 17 जुलाई के आदेश को स्पष्ट करने की मांग की है.

अर्जी में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट स्पष्ट करे कि 15 विधायकों को सदन की कार्यवाही से छूट देने का आदेश पार्टी व्हिप जारी करने के संवैधानिक अधिकार का हनन है. अर्जी में पार्टी व्हिप जारी करने के संवैधानिक अधिकार का मुद्दा उठाया गया है जबकि राज्यपाल के बहुमत साबित करने का समय तय किए जाने को भी ग़लत बताया गया है.

कर्नाटक में पिछले कई दिनों से चल रहे राजनीतिक संकट का हल आज निकल सकता है. कर्नाट‍क विधानसभा में आज फ्लोर टेस्‍ट संभव है. साथ ही कर्नाटक मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी कई याचिकाएं लंबित हैं, जिनपर आज सुनवाई हो सकती है. कांग्रेस-जेडीएस सरकार के 15 विधायकों के इस्‍तीफे के बाद से उपजे राजनीतिक संकट के बाद पिछले हफ्ते गुरुवार और शुक्रवार विधानसभा में विश्‍वास मत पर बहस हुई. इसके बाद स्‍पीकर रमेश कुमार ने सदन की कार्यवाही सोमवार तक के लिए टाल दी थी. प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के एकलौते विधायक एन महेश को मायावती ने आदेश दिया है कि वह सरकार के पक्ष में मतदान करें. इससे पहले कहा जा रहा था कि वह विश्वासमत से दूर रहेंगे.

सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता दिशा राय द्वारा दाखिल याचिका में कहा गया है कि मुख्यमंत्री या गठबंधन सरकार में सहयोगी कांग्रेस और जेडी-एस कुछ और बहाना बनाकर शक्ति-परीक्षण टालने की कोशिश करेंगे. याचिका के अनुसार, "ऐसा माना जाता है कि अल्पसंख्यक सरकार की अगुवाई करने वाले मुख्यमंत्री खुद को सदन की कार्यवाही से सोमवार को अलग रख सकते हैं. ऐसा माना जाता है कि वह (कुमारस्वामी) विश्वास मत को टाल सकते हैं. विश्वास मत को टालने के लिए वह अस्पताल में भर्ती समेत कोई चिकित्सा संबंधी आपात स्थिति का इस्तेमाल कर सकते हैं."



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