कांची कामकोटि मठ: शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती को दी जा रही है महासमाधि, लाखों लोगों ने किये दर्शन

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तमिलनाडु में कांची कामकोटि पीठ के प्रमुख और 69वें शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती के अंतिम संस्कार की रस्म शुरू हो गई है। इस दौरान सबसे पहले शंकराचार्य का दूध और शहद से अभिषेक हुआ। फिर वैदिक हवन और पूजन किया गया। जयेंद्र सरस्वती को मठ के बृंदावन भवन में महासमाधि दी जाएगी। बुधवार को निधन के बाद उनकी पार्थिव देह मठ में रखी गई, गुरुवार सुबह तक 1 लाख से ज्यादा लोगों ने शंकराचार्य के दर्शन किए थे। जयेंद्र ने 65 साल तक कांची पीठ की गद्दी संभाली। उन्हें सीने में दर्द के बाद कांचीपुरम के प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। जहां जयेंद्र सरस्वती (83) ने आखिरी सांस ली। अब उनकी जगह शंकर विजयेंद्र सरस्वती पद संभालेंगे।

मठ के मैनेजर सुंदरेशन ने बताया कि वैदिक विधि से शंकराचार्य के बृंदावन प्रवेशम् (अंतिम संस्कार) की तैयारियां की गईं। यह प्रक्रिया सुबह 8 बजे शुरू होकर दोपहर तक चलेगी। इस दौरान दूध और शहद से शंकराचार्य का अभिषेक करने के बाद उनकी देह को सजाया गया है। वैदिक हवन-पूजन किया जा रहा है। इसके बाद जयेंद्र सरस्वती का बृंदावन भवन में प्रवेश होगा। यहां महासमाधि के लिए 7X7 फीट का गड्ढा खोदा गया है। यही रस्म 1993 में शंकराचार्य के गुरु चंद्रशेखरेंद्र सरस्वती के लिए भी कराई गई थी।

जयेंद्र सरस्वती का जन्म 18 जुलाई 1935 को तमिलनाडु में हुआ। वह कांची मठ के 69वें शंकराचार्य थे। जयेंद्र 1954 में शंकराचार्य बने थे। इससे पहले उनका नाम सुब्रमण्यन महादेव अय्यर था। उन्हें सरस्वती स्वामिगल का उत्तराधिकारी घोषित किया गया था। तब उनकी उम्र महज 19 साल थी। जयेंद्र 65 साल तक शंकराचार्य रहे। 2003 में उन्होंने बतौर शंकराचार्य 50 साल पूरे किए थे। 1983 में जयेंद्र सरस्वती ने शंकर विजयेन्द्र सरस्वती को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था। 

बता दें कि कांची मठ की स्थापना खुद आदि शंकराचार्य ने की थी। जो कांचीपुरम में स्थापित सबसे बड़ा हिंदू मठ है। यह 5 पंचभूतस्थलों में से एक है। यहां के मठाधीश्वर को शंकराचार्य कहते हैं।

जयेंद्र सरस्वती जब पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम से मिलने राष्ट्रपति भवन पहुंचे थे, तब कलाम ने जयेंद्र को अपनी कुर्सी पर बैठा दिया। जयेंद्र बोले ये क्यों किया? तब कलाम ने कहा- ताकि इस कुर्सी पर हमेशा आपका आशीर्वाद बना रहे।



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