82 साल की उम्र में कांची पीठ के शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती का निधन

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देश के 4 प्रमुख पीठों में से एक कांची मठ के प्रमुख जयेंद्र सरस्वती नहीं रहे. जयेंद्र सरस्वती का 82 वर्ष की उम्र बुधवार को निधन हो गया. जयेंद्र सरस्वती का जन्म 18 जुलाई 1935 को हुआ था. उनका वास्तविक नाम सुब्रहमण्यम महादेव अय्यर था. दक्षिण भारत के तमिलनाडु राज्य में कांचीपुरम नगर में स्थित कांची कामकोटि पीठ के वह 69वें शंकराचार्य थे. उन्हें वेदों के ज्ञाता माना जाता था. जून 2003 में उन्हें कांची पीठ के शंकराचार्य के पद पर आसीन हुए पचास वर्ष हो गए थे. 1983 में उन्होंने शंकर विजयेन्द्र सरस्वती को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था.

कांची पीठ हिंदू धर्म का अनुसरण करने वालों के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है. ये पीठ दक्षिण भारत के तमिलनाडु राज्य में कांचीपुरम नगर में स्थित है. कांची पीठ कई धार्मिक संस्थान, शिक्षा संस्थान, अस्पताल, वृद्ध लोगों के लिए घर और एक विश्वविद्यालय भी चलाती है.

शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती कभी खुलकर नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाए जाने के पक्ष में आ गए थे. उन्होंने कहा था कि नरेंद्र मोदी बहुत अच्छे व्यक्ति हैं. उन्हें प्रधानमंत्री बनना ही चाहिए. उन्होंने देश की वर्तमान शासन व्यवस्था को भी ठीक नहीं बताते हुए इसे सुधारने के प्रयास करने की बात कही थी.

2004 के बहुचर्चित शंकररमन मर्डर केस में पुडुचेरी की अदालत ने कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती, उनके भाई विजयेंद्र समेत सभी 23 आरोपियों को बरी कर दिया था. इस मामले में जयेंद्र सरस्वती और विजयेंद्र पर हत्या का आरोप था और उन्हें मुख्य आरोपी बनाया गया था. करीब नौ साल तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद पुडुचेरी के चीफ डिस्ट्रिक्ट ऐंड सेशन जज सीएस मुरुगन ने इस मामले में फैसला सुनाया. जज ने कहा कि गवाह अभियोजन के मामले का समर्थन नहीं कर पाए कि दोनों शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती और विजयेंद्र हत्या की साजिश का हिस्सा थे.



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