खुलने से पहले ही जियो इंस्टीट्यूट को दिया गया ‘उत्कृष्ठ संस्थान’ का दर्जा, विवाद बढ़ने पर सरकार ने दी सफाई

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जियो इंस्टीट्यूट के खुलने से पहले ही उसे उत्कृष्ठ संस्थानों की लिस्ट में शामिल करने को लेकर उठे विवाद के बीच केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय ने सफाई दी है. उच्च शिक्षा विभाग के सचिव आर सुब्रमण्यम ने कहा कि नियमों के तहत कुछ नए संस्थानों को भी लिस्ट में शामिल किया जा सकता है. सचिव आर सुब्रमण्यम ने कहा कि जियो इंस्टीट्यूट को ग्रीनफील्ड कैटिगरी के तहत चुना गया है. तीसरी कैटिगरी यानी ग्रीनफील्ड के तहत नए संस्थानों को भी शामिल किया जा सकता है. इसका उद्देश्य नए संस्थानों को प्रोत्साहित कर विश्व स्तर के इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना और शिक्षा देना है. इस कैटिगरी के तहत 11 संस्थानों के प्रस्ताव हमारे पास आए थे जिसमें जमीन अधिग्रहण, इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार, शिक्षा की गुणवत्ता जैसे सभी पहलुओं को देखते हुए केवल एक संस्थान ही श्रेणी के लिए उपयुक्त थी.

गौरतलब है कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने सोमवार को छह विश्वविद्यालयों को उत्कृष्ट संस्थान का दर्जा प्रदान करने की घोषणा की थी. इनमें सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों में आईआईटी दिल्ली, आईआईटी बंबई और आईआईएससी बेंगलोर शामिल हैं. वहीं मंत्रालय ने निजी क्षेत्र से मनिपाल एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन, बिट्स पिलानी और जियो इंस्टीट्यूट को भी उत्कृष्ट संस्थान का दर्जा प्रदान किया.

लिस्ट जारी होने के बाद जियो इंस्टीट्यूट को लेकर विवाद शुरू हो गया. क्योंकि इससे पहले किसी ने जियो इंस्टीट्यूट का नाम नहीं सुना था. गूगल सर्च में भी इसके बारे में किसी तरह का कोई रिजल्ट नहीं मिल रहा था. सिर्फ कागजों में उपस्थित इस संस्थान का नाम उत्कृष्ठ संस्थानों की लिस्ट में आने के बाद सरकार की आलोचना शुरू हो गई. सोशल मीडिया खासकर ट्विटर लोगों ने इस बारे में मजे लेने शुरू कर दिए.

केंद्रीय एचआरडी मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने आईआईटी दिल्ली, आईआईटी बंबई और आईआईएससी बेंगलोर के साथ मनिपाल एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन, बिट्स पिलानी और जियो इंस्टीट्यूट को उत्कृष्ट संस्थान का दर्जा मिलने पर बधाई दी थी. उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में और संस्थानों को उत्कृष्ट संस्थान के रूप में मान्यता मिल सकेगी. उत्कृष्ट संस्थानों को सरकारी वित्त पोषण प्राप्त होगा क्योंकि सार्वजनिक क्षेत्र के जिन संस्थानों को उत्कृष्ट संस्थान का दर्जा प्रदान किया गया है, उन्हें अगले पांच वर्षो के दौरान 1000 करोड़ रुपए का सरकारी अनुदान मिलेगा.



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