डब्लिन में दहाड़ा हिन्दुस्तानी शेर, संगीतकार राज महाजन के भतीजे पारस गुप्ता ने WFF-2016 चैंपियनशिप में रजत पदक जीतकर रचा नया कीर्तिमान

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फिटनेस चैम्प उर्फ़ इंडियन लायन पारस गुप्ता ने डब्लिन में हिंदुस्तान के नाम का झंडा फेहरा दिया. यहाँ होने वाली WFF (FITNESS CHAMPIONSHIP-2016) में पारस ने वर्ल्ड लेवल पर सीनियर केटेगरी में सिल्वर मैडल जीतकर साबित कर दिया कि हिन्दुस्तानी शेर की दहाड़ होती है खतरनाक. 25 साल के पारस पहले सबसे कम उम्र के ऐसे खिलाड़ी बन गए हैं जो इंटरनेशनल लेवल पर सीनियर केटेगरी में अपने देश हिंदुस्तान का प्रतिनिधित्व कर पदक जीत लायें हो. इससे पहले राष्ट्रीय स्तर पर पारस कई पदक अपने नाम कर चुके हैं.

World Fitness Federation (WFF) 2016 इस बार डब्लिन में आयोजित की गई. जिसे सफल बनाया BSN कंपनी ने. प्रतियोगिता में कई देशों के विभिन्न प्रतियोगियों ने अपनी फिटनेस के आगे निर्णायकों को हैरान कर दिया. कई मापदंडों से गुजरकर पारस ने बाज़ी मारते हुए सिल्वर मैडल अपने नाम किया. चीन पहले स्थान पर रहा.

इस मौके पर जीत के उत्साह से लबरेज पारस ने अपने फैन्स और चाहने वालों को धन्यवाद किया. उन्होंने कहा, “यह जीत मैं अपने देश भारत के नाम करता हूँ. एक खिलाड़ी को इसी दिन का इंतज़ार रहता है जब वह देश का नाम रोशन करे. मैं आज खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहा हूँ जो मुझे यह मौका मिला”.

आगे उन्होंने कहा, “मैं अपने परिवार और फैन्स का भी शुक्रिया अदा करता हूँ जिनके भरोसे और साथ की वजह से मैं यह नामुमकिन काम मुमकिन कर पाया. यह जीत, यह मैडल पूरे हिन्दुस्तान के लिए. सफर यहाँ खत्म नहीं हुआ बल्कि शुरु हुआ है और उम्मीद करता हूँ ऐसा ही प्यार और साथ हमेशा बना रहेगा.

वहीँ इस जीत पर रजत पदक विजेता के चाचा और प्रसिद्ध संगीतकार राज महाजन ने कहा, “अच्छा लगता है जब अपना बच्चा कुछ भी हासिल करता है. यह तो बहुत बड़ी उपलब्धि है. पारस की इस जीत पर उसे मुबारक और आशीर्वाद देता हूँ. भगवान ऐसे ही उसकी तरक्की बनाये रखे.

ज्ञात हो राज महाजन का नाम बिग बॉस के संभावित प्रतियोगियों के तौर पर काफी उछाला गया था. मीडिया पहले ही अच्छा-खासा उनके नाम को भुना चुकी है. अब पारस की यह जीत मीडिया की सुर्खियाँ बनने को तैयार है. 

अपने भतीजे की इस जीत पर उनके चाचा गिरीश आर्यन गुप्ता भी अपने दिली ज़ज्बात कुछ इस तरह से कहते नज़र आये. गिरीश के मुताबिक, “पारस के दिल में एक अजीब सी ही सनक थी, कुछ ऐसा करने की जो हमारे परिवार में से किसी ने न किया हो. हमेशा अपनी एक अलग ही दुनिया में रहता था वो. बचपन में काफी दुबला-पतला हुआ करता था. लोग उसका मजाक बनाते थे. उसने इस बात को अपने दिल से लगा लिया और कहते हैं न दिल को चुभने वाली बात कुछ कर गुजरती है. बस एक वो दिन था और एक आज का दिन. कल का दुबला-पतला पारस आज का ‘चैंपियन’ बन गया. उसकी कमजोरी ही उसकी ताकत बनी. इस पल इससे ज़्यादा समझ नहीं आ रहा क्या कहूं. उसकी इस जीत की ख़ुशी ने शब्द ही छीन लिए. नाज़ है वो हमारा बेटा है.”

जानकारी हो कि पारस सीनियर केटेगरी में सबसे कम उम्र के पार्टिसिपेंट थे जिन्होंने इस टाइटल को अपने नाम करा और सिल्वर मैडल हासिल किया. उनकी इस जीत पर उनके 85 वर्षीय दादा समाजसेवी (अविनाश चंद गुप्ता) ने कहा, “बचपन से ही लगता था पारस कुछ अलग करेगा. आज जिस मुकाम पर वो है वहां उसे देखकर अच्छा लगता है. पारस की इस जीत पर पूरे देश के साथ-साथ हमें भी गर्व है.

वहीँ पारस की बचपन की एक ख़ास आदत का जिक्र करते हुए उनके पापा सुनील गुप्ता ने कहा, “बचपन में घंटो-घंटो पारस शीशे के सामने खड़े होकर पोज बनाकर खुद को देखता रहता था. तब इस बात का अंदाज़ा भी नहीं लगा सकते थे कि एक दिन सच में इतना बड़ा कारनामा कर दिखाएगा. गर्व होता है ऐसे बच्चे के माता-पिता कहलाने पर जो देश का नाम विश्व पटल पर रोशन कर रहा हो.” 

अपने भाई की इस जीत पर उत्साहित होते हुए पियूष गुप्ता (परस गुप्ता के जुड़वाँ भाई) ने कहा, “मैं हमेशा से ही उसे कुछ अलग ही करते हुए देखता था. बचपन में मैं पढ़ने में ध्यान देता था और वो बॉडी बिल्डिंग और फिटनेस पर. देखने में हम दोनों हूबहू एक जैसे हैं. लेकिन हमारी आदतें एक दुसरे से अलग हैं. आज ऐसा लग रहा है जैसे मैं ही जीता हूँ. उसकी इस कामयाबी को मैं अपने अंदर महसूस कर रहा हूँ. बस अब उसके वापिस आने का इंतज़ार है. उसने देश का नाम ऊँचा किया है, उसके वेलकम के लिए बहुत सारी तैयारी करनी है.” चैंपियन आ रहा है भई!  

पारस की इस जीत पर उनके परिवार से लेकर उनके फैन्स और पूरा हिंदुस्तान फक्र महसूस कर रहा है. वाकई में ऐसे ही लालों से लहला उठती है धरती माँ. जीत के बाद से ही उनके घर पर फोन कॉल्स और बधाइयों का तांता लगा हुआ है.    



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