गोवा: मुख्य पादरी ने की लोगों से अपील, कहा- संविधान खतरे में, खुशामद की राजनीति से बचें

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पूरे देश में चुनाव का माहौल बना हुआ है. इससे कुछ परेशान भी है क्यूंकि राजनीति का स्तर पिछले कुछ दिनों में काफी गिर सा गया है. इसी वजह से गोवा के मुख्य पादरी फिलिप नेरी फेरारो ने सभी चर्चों को राय दी है कि वह राजनीति में सक्रिय भागीदारी निभाएं क्योंकि भारतीय संविधान खतरे में है और सभी पर एक तरह की संस्कृति थोपने की कोशिश की जा रही है. 

वैसे ये पहली बार है जब फेरारो ने खुलेतौर पर गोवा के कैथोलिक चर्चों से अपील की है कि वह चुनाव के लिए तैयार हो जाएं. राज्य की 1.5 मिलियन जनसंख्या में कैथोलिक की संख्या 25 फीसदी है. अपने पत्र में फेरारो ने लिखा है कि कैथोलिक बिशप कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया ने अपनी पूर्ण सभा में घोषित किया था कि चर्च को धर्मनिरपेक्षता, बोलने की आजादी और भारतीय संविधान के अनुसार हर किसी को अपने धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता जैसे मूल्यों के प्रचार-प्रसार के लिए खड़ा रहना चाहिए.

उन्होंने समुदाय को पत्र लिखा और कहा- संविधान को ठीक से समझा जाना चाहिए, क्योंकि आम चुनाव करीब आ रहे हैं. उन्होंने 1 जून से पादरी वर्ष (पैस्टोरल ईयर) की शुरुआत के मौके पर जारी पत्र में गोवा एवं दमन क्षेत्र के ईसाई समुदाय को संबोधित किया गया है और इस पत्र में यह लिखा है.

इससे पहले दिल्ली के प्रधान पादरी अनिल कोटो ने एक पत्र लिखकर कहा था कि भारत एक अशांत राजनीतिक वातावरण का साक्षी बन रहा है और समुदाय को आने वाले मतदान को ध्यान में रखते हुए एक प्रार्थना अभियान चलाना चाहिए. कोटो के बयान की बुरी तरह से आलोचना भी हुई थी. 

आपको बता दें साल 2018-19 के जारी किए गए पत्र में फेरारो ने लिखा है, 'यह सलाह दी जाती है कि वफादार राजनीतिक क्षेत्र में एक सक्रिय भूमिका निभाते हैं, उन्हें निभानी चाहिए. हालांकि ऐसा करते समय अपने विवेक के निर्देशों का पालन करें और खुशामद राजनीति से किनारा करें. इससे जहां एक तरफ लोकतंत्र मजबूत होगा वहीं दूसरी ओर राज्य प्रशासन के कामकाज में सुधार लाने में मदद मिलेगी. पूरे देश के लोगों को अपनी जमीन और घरों से विकास के नाम पर बाहर निकाला जा रहा है. पादरी ने चेतावनी देते हुए कहा है कि मानवाधिकारों को रौंदा जा रहा है. 



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