इंदौर में पत्नी की जान बचाने के लिए बिलखिलाता रहा पति, 100 से ज्यादा गाड़ियां गुजरीं पर किसी ने नहीं की मदद

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रोड पर खून से लथपथ बेहोश पड़ी 28 साल की पत्नी. पास में ही बिलखती पांच साल की बेटी... वहीं चिल्ला-चिल्लाकर और हाथ फैलाकर राहगीरों को रोकता पति. इस उम्मीद में कि कोई तो रुके और उसकी तड़पती पत्नी को अस्पताल ले जाए. वहां से 100 से ज्यादा गाड़ियां गुजरीं. इनमें कुछ लाल तो कुछ पीली बत्ती वाली भी. कुछ लोग रुके, लेकिन महिला को लहूलुहान देखकर भी आगे बढ़ गए. पति ने पुलिस को भी फोन किया. 20 मिनट बाद एक गाड़ी रुकी. महिला को उज्जैन के अस्पताल ले गए, लेकिन उसकी सांस थम चुकी थी.

एक मौत का दु:ख और एक परिवार को नहीं बचा पाने की शर्मिंदगी का यह दृश्य सोमवार को सांवेर रोड का था, जहां इंदौर से उज्जैन जा रहे बाइक सवार पं. सुधीर शर्मा निवासी हुकमचंद कॉलोनी, पत्नी नेहा और बेटी माही को कार ने टक्कर मार दी. उज्जैन से पति पत्नी का शव लेकर यहां आए और पुलिस ने पोस्टमॉर्टम करवाया. सुधीर पंडिताई करते हैं, जबकि नेहा घर पर ही सिलाई का काम करती थीं.

पत्नी और बेटी माही को लेकर मैं सुबह 10 बजे बाइक से उज्जैन जा रहा था. सांवेर रोड पर मेरा पर्स गिर गया, जिसे उठाकर नेहा आ रही थी, तभी एक कार ने उसे टक्कर मार दी और 25 फीट तक घसीटा. सिर से खून बह रहा था. बेटी रोने लगी. मैं पत्नी को अस्पताल ले जाने के लिए 20 मिनट से ज्यादा समय तक चिल्लाता रहा पर किसी ने नहीं सुना. पुलिस को भी फोन किया. इस दौरान करीब 100 गाड़ियां वहां से गुजर गईं. लाल और पीली बत्ती लगी गाड़ियां भी. आखिरकार मैं बीच रोड पर खड़ा हो गया. एक इंडिका कार चालक रुका और हमें उज्जैन के एक अस्पताल ले गया. वहां डॉक्टरों ने पत्नी की मौत की बात कह दी.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश से रास्ते में कोई घायल की मदद करता है तो पुलिस संबंधित मददगार से जानकारी ले सकती है, लेकिन किसी भी तरह से सख्ती नहीं कर सकती और न ही परेशान कर सकती है. रविवार को कनाड़िया क्षेत्र में सड़क हादसे में घायल को मदद पहुंचाने वाले डीआईजी हरिनारायणाचारी मिश्र का कहना है कि सड़क पर किसी घायल व्यक्ति की मदद करने पर पुलिस मददगार से पूछताछ नहीं करती है. लोगों को घायल व्यक्ति की तुरंत मदद करना चाहिए. व्यक्ति की जान बचाना पहली प्राथमिकता है. उसके बाद कानूनी प्रक्रिया है. आपको बता दें कि दिल्ली सरकार ने सड़क दुर्घटनाओं के शिकार हुए पीड़ितों को दिल्ली के सभी अस्पतालों में सरकारी खर्चे पर नि:शुल्क उपचार की योजना लागू की है. साथ ही दुर्घटना में घायल को अस्पताल तक पहुंचाने वाले को 2 हजार रुपए और प्रमाणपत्र दिए जाने की व्यवस्था भी की है.



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