हनी से मीठा ‘हनी ट्रैप’ - राज कुमार गुप्ता

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पाकिस्तान ने आजकल एक नई ट्रिक सिख ली है. इस ट्रिक का नाम है ‘हनी ट्रैप’. सबसे बड़ा सवाल उठता है ये कैसे करता है काम? विश्व के तमाम मुल्क अपने दुश्मन का राज जानने के लिए नए-नए हथकंडे आजमाते रहते हैं क्योंकि लड़ाई सिर्फ सरहद पर ही नहीं होती. दुश्मन के घर में सेंध लगाकर कई जानकारी जुटा लेना भी लड़ाई का अहम हिस्सा होता है. एक बार दुश्मन देश से जुड़ा कोई अहम डाक्यूमेंट्स या खुफिया जानकारी हाथ लग जाए तो उसके विरोध में रणनीति बनाना बेहद सरल हो जाता है और ये काम एक महिला जासूस से बढ़िया कौन कर सकता है? पाक की खुफिया एजेंसी ISI भी इन दिनों भारत के खिलाफ इसी हथियार का प्रयोग कर रहा है. जिसे कहते हैं - हनी ट्रैप. 

हाल-फिलहाल की दो हरकतों से जाहिर हो गया है कि आईएसआई से जुड़ी महिलाएं सोशल मीडिया पर भारतीय सेना के जवानों से दोस्ती गांठ रही हैं. फेसबुक पर हुई इस दोस्ती में कभी भी सामने वाले की असलियत साफ नहीं होती. फेसबुक पर हुई ये दोस्ती कई बार प्यार और शादी की दहलीज तक पहुंच जाती है. 

कहते हैं इंसान की सबसे बड़ी सच्चाई उसकी पहचान होती है, लेकिन हनी ट्रैप की असली पहचान कभी जाहिर ही नहीं होती. हनी ट्रैप के मिशन पर निकली महिला दोस्ती की आड़ में न सिर्फ जानकारियां हासिल करती है बल्कि कई बार अहम दस्तावेज भी उनके हाथ लग जाते हैं. कई मामलों में महिला सिर्फ लच्छेदार बातों का ही सहारा नहीं लेती बल्कि अपने शिकार को ब्लैकमेल भी करती है. अगर शिकार की कोई आपत्तिजनक तस्वीर या खास बातचीत की कोई डिटेल हाथ लग जाए तो उसे जगजाहिर करने की धमकी भी दी जाती है. बदनाम होने के डर से वो शख्स अहम से अहम राज भी उगल देता है.

कांगड़ा और हैदराबाद के केस में फेसबुक के जरिए दोनों जवानों को जाल में फांसा गया. बातों-बातों में उनसे अहम राज निकाले गए और जब बात नहीं बनी तो पैसे देने का लालच भी दिया गया. इन मामलों में शिकार को इस बात का इल्म काफी वक्त बाद होता है कि वो हनी ट्रैप में फंस चुका है. 

पाकिस्तान यह बात अच्छे से जानता है कि हिन्दुस्तानी अफसरों की यही कमजोरी है. यह कोई पहला मामला नहीं है जब इस तरह का कुछ सामने आया हो. ताज़ा हुए इन मामलों ने गंभीरता से विचार करने पर मजबूर कर दिया है. सवाल यह है कि ऐसे हालात बनते ही क्यूँ हैं? क्यूँ कोई अफसर महिलाओं का शिकार हो जाता है. ऐसी क्या जरुरत आ पड़ती है जो शिकार होने के बाद शिकार को खबर लगती है. लेकिन तब तक वो देश का बहुत नुक्सान कर चुके हैं. जल्द-से-जल्द इन सभी चीज़ों को रोका जाना चाहिए. समस्या नज़र आ गई है तो अब उसकी जड़ तक भी पहुंचना होगा.   


 



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