राज्‍यसभा में गृहमंत्री अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर आरक्षण विधेयक और राष्‍ट्रपति शासन बढ़ाने का प्रस्ताव किया पेश, विपक्ष ने किया विरोध

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केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सोमवार को राज्‍यसभा में जम्‍मू-कश्‍मीर आरक्षण विधेयक और राज्‍य में राष्‍ट्रपति शासन को छह माह और बढ़ाने के प्रस्‍ताव को पेश किया. उन्‍होंने कहा, जम्‍मू कश्‍मीर आरक्षण विधेयक से राज्‍य के 435 गांवों को फायदा मिलेगा. उन्‍होंने कहा, राज्‍य के जम्‍मू, सांबा और कठुआ को इस बिल का लाभ मिलेगा.

जम्मू कश्मीर में राष्ट्रपति शासन की अवधि बढ़ाने संबंधी प्रस्ताव पेश करते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, 2 जुलाई को राष्ट्रपति शासन की अवधि खत्म हो रही है. 20 जून 2018 को पीडीपी सरकार के पास समर्थन न होने और फिर किसी भी पार्टी द्वारा सरकार बनाने का दावा पेश न करने के चलते वहां 6 माह के लिए राज्यपाल शासन लगा दिया गया था. 21 नवंबर 2018 को विधानसभा भंग कर दी गई थी. राज्यपाल शासन के बाद केंद्र सरकार ने धारा 356 का इस्तेमाल कर राज्‍य में राष्ट्रपति शासन लगाने का फैसला किया. इसी प्रस्‍ताव को छह माह और बढ़ाने का प्रस्‍ताव राज्‍यसभा में पेश किया गया.

गृह मंत्री अमित शाह ने इसके साथ ही जम्मू कश्मीर आरक्षण संशोधन विधेयक राज्यसभा में पेश करते हुए कहा, वास्तविक नियंत्रण रेखा, एलओसी के लोगों की समस्याओं एक जैसी हैं और उन पर भी पाकिस्तान की ओर से की जाने वाली गोलीबारी का असर होता है, ऐसे में उन लोगों को भी आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए.

जम्मू कश्मीर आरक्षण बिल और राष्ट्रपति शासन बढ़ाने के प्रस्ताव पर चर्चा को लेकर राज्यसभा में सभापति ने कहा, इसके लिए 5 घंटे का समय तय किया गया है. कांग्रेस की ओर से विप्लव ठाकुर ने इस मुद्दे पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि लोकसभा के साथ विधानसभा के चुनाव क्यों नहीं कराए गए. उन्होंने कहा कि कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस ने सरकार बनाने का दावा किया था, लेकिन इनका फैक्स तब काम नहीं कर रहा था. ठाकुर ने कहा कि आप लोग नहीं चाहते हैं कि वहां चुनाव हो. आप लोग जम्मू कश्मीर के लोगों के साथ धोखा कर रहे हैं. कांग्रेस ने प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि राष्ट्रपति शासन न बढ़ाया जाए और वहां चुनाव का ऐलान किया जाए.



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