अपराधी चरम पर...पुलिस शर्म पर- राज कुमार गुप्ता

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हरियाणा में महिलाओं का खौफ में जीना कोई नई बात नहीं है. चाहे खापों के अमानवीय फैसले हों, या डेरों के कारनामे हों, या फिर आपराधिक वारदातें, अधिकतर शिकार स्त्रियां ही हुई हैं. परन्तु राज्य सरकार का बर्ताव अपने कर्तव्य के प्रति सचेत रहने की जगह उदासीनता का ही रहा है. हरियाणा में कानून-व्यवस्था बेहद लचर-पचर है या यूँ कहें कि बेहद शर्मनाक है. पिछले दस-ग्यारह दिनों में प्रदेश में सामूहिक बलात्कार और हत्या की घटनाओं से जाहिर है कि राज्य में राज-काज का क्या आलम है? अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि दिनदहाड़े कॉलेज छात्रा को किडनैप कर लेते हैं और फिर कार में रेप कर फेंक जाते हैं. दूसरी ओर ऐसी हरकतों को रोक पाने में नाकाम पुलिस के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक आरसी मिश्रा का यह गैरजिम्मेदाराना और शर्मनाक बयान सामने आता है कि बलात्कार की घटनाएं समाज का हिस्सा हैं और चिरकाल से चली आ रही हैं. जाहिर है, राज्य पुलिस की दशा और मानसिकता क्या है.

जींद-दलित मामला: प्रदेश में पहली घटना तेरह जनवरी को हुई. जींद में नहर के पास पंद्रह साल की एक दलित लड़की की लाश मिली थी. इस लड़की के साथ हुई दरिंदगी ने लोगों को दिल्ली के निर्भया कांड की याद दिला दी. इसके अलावा, इस मामले के एक नामजद आरोपी की भी हत्या हो गई. पूरी घटना से प्रतीत है कि शायद इसके तार कहीं और हों, और पूरे मामले को छिपाने-सबूत मिटाने का खेल रचा जा रहा हो.

लोकगायिका ममता शर्मा: बीते गुरुवार को हरियाणवी लोकगायिका ममता शर्मा की लाश मिली. चार दिन से लापता ममता शर्मा की गला रेत कर हत्या कर लाश गन्ने के खेत में फेंक दी गई. लाश रोहतक जिले के जिस बनियानी गांव में मिली वह मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर का गांव है. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि अपराधी कितने बेखौफ हो चुके हैं! सवाल है कि सरकार आखिर कर क्या रही है? जनता के गुस्से और अपनी एक राज्य सरकार की किरकिरी से परेशान भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने मुख्यमंत्री खट्टर को दिल्ली तलब किया. राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी ने प्रदेश के पुलिस प्रमुख बीएस संधू को बुला कर हालात पर चर्चा की. पुलिस प्रमुख ने बताया कि पंद्रह साल तक की लड़कियों से बलात्कार के मामले में त्वरित अदालतें बनाने और सजा के कड़े प्रावधानों पर विचार किया जा रहा है. सरकार दुष्कर्म के ऐसे मामलों में फांसी की सजा के प्रावधान की सिफारिश कर सकती है, जैसा कि मध्यप्रदेश सरकार ने कदम उठाया है.

राजनीतिक पार्टियां वोट का खयाल कर न अमानवीय पंचायती फैसलों के खिलाफ बोलती हैं न संदिग्ध बाबाओं के खिलाफ. जिनकी पहुंच सत्ता के गलियारे तक है, ऐसे भी कई लोग अपने को कानून से ऊपर समझने से बाज नहीं आते. पिछले साल अगस्त में हरियाणा भाजपा अध्यक्ष के बेटे ने राज्य के एक वरिष्ठ आइएएस अधिकारी की बेटी के साथ छेड़छाड़ की थी. जाहिर है, अपने पिता के राजनीतिक रसूख के बल पर ही उसने यह दुस्साहस किया होगा. सवाल है कि ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ का नारा देने वाली सरकार आखिर बेटियों की सुरक्षा क्यों नहीं कर पा रही है!

मेरी नज़र में इन जघन्य अपराधों की सिर्फ एक ही सजा है. जो महिलाओं के सम्मान को कुचले उसे कुचल दो.
 



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