दिवाली 2017 : पटाखों का धुआं है खतरनाक, इन बातों का रखें ख्याल

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दिवाली और आतिशबाजी का गहरा नाता है. लक्ष्मी पूजन के बाद शगुन के रूप में पटाखे फोड़े जाते हैं. पटाखे जलाते वक्त बड़े-बड़े तक बच्चे बन जाते हैं तो फिर बच्चों का तो कहना ही क्या. वहीं, उत्साह और उमंग में थोड़ी-सी गलती भारी पड़ सकती है.

हवा में जहर घोलते ये पटाखे कई प्रकार की शारीरिक औक मानसिक व्याधियों को जन्म दे रहे हैं. पटाखों की धमक हमारे चेहरे पर जरूर मुस्कान लाती है, लेकिन यह मुस्कान कब किसी दुर्घटना में बदल जाए इसका किसी को पता नहीं होता.

पटाखे के धुएं से अस्थमा और फेफड़ों की बीमारी

जब पटाखे जलते और फूटते हैं तो उससे वायु में सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड आदि गैसों की मात्रा बढ़ जाती है. ये हमारे शरीर के लिए नुकसानदेह होती हैं. पटाखों के धुएं से अस्थमा और अन्य फेफड़ों संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. पटाखों की आवाज हमारी सुनने की शक्ति पर भी प्रभाव डालती है. इससे भविष्य में हमारी सुनने की शक्ति कमजोर हो सकती है.

बच्चों को पटाखों से रखें दूर

पटाखे खरीदते वक्त हमेशा क्वॉलिटी का ध्यान रखें. साथ ही घर में पटाखे ऐसी जगह पर रखें, जो बच्चों की पहुंच से दूर हों. आतिशबाजी चलाते वक्त बच्चों को पटाखों से निश्चित दूरी बनाए रखने के बारे में समझाएं. उन्हें बताएं कि वे पटाखों को झुककर न जलाएं.

गर्भवती महिलाएं पटाखों से बनाएं दूरी

गर्भवती महिलाओं के लिए तो पटाखे किसी विनाशकारी हथियार से कम नहीं हैं. पटाखों से सल्फर डाइआक्साइड और नाइट्रोजन डाइआक्साइड आदि हानिकारक गैसें हवा में घुल जाती हैं, जो हमारे शरीर के लिए नुकसानदेह होती हैं.

जानकारों के अनुसार , पटाखों में कम से कम 21 तरह के रसायन मिलाए जाते हैं. वहीं कई वैज्ञानिकों का कहना है एक लाख कारों के धुएं से जितना नुकसान पर्यावरण को होता है, उतना नुकसान 20 मिनट की आतिशबाजी से हो जाता है.



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