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किसान आन्दोलन: राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र में विरोध के रूप में सड़कों पर बहाया दूध, मंदसौर हाई अलर्ट पर

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आज सुबह से ही राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और महाराष्ट्र में किसानों ने प्रदर्शन किया. इस बीच अपने विरोध को दर्शाने के लिए किसानों ने सड़क पर दूध और सब्जियां गिराना शुरू कर दिया. इसी के मद्देनजर मध्यप्रदेश सहित कई राज्यों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है. मंदसौर में हाईअलर्ट घोषित है.

हरियाणा के फतेहाबाद में किसानों ने मिल्क प्लांट के ट्रक को रोककर उसका दूध सड़क पर गिरा दिया. वहीं, जींद में मिल्क प्लांटों पर गांवों से दूध की आवाक बहुत कम रही. कैथल में किसानों ने सब्जियों को सड़क पर फेंककर सरकार को विरोध दर्शाया. 

सातारा, मनमाड़ और अहमदनगर में किसानों ने विरोध स्वरूप सड़कों पर दूध बहाते हुए सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया. पुणे-बेंगलुरु हाईवे पर भी किसानों ने सड़कों पर बहाया दूध. पुणे के अंबेगांव, कोल्हापुर, सांगली, सोलापुर, नासिक, जलगांव, परभणी, लातूर और औरंगाबाद के किसान सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन कर रहे हैं.

नासिक में किसानों ने टमाटर के ट्रक को रोक दिया. किसानों से कहा गया है कि वे हड़ताल के दौरान फल, फूल, सब्जी और अनाज को अपने घरों से बाहर न ले जाएं, और न ही वे शहरों से खरीदें और न गांवों में बिक्री करें.

सिरसा कस्बे के चोपाटा में आंदोलन का व्यापक प्रभाव है. कई जिलों में गांवों के बाहर किसान धरना दे रहे हैं.

किसानों ने घोषणा की है कि आंदोलन में न तो दूध बेचेंगे और न ही फल-सब्जी मंडी में लाएंगे. प्रशासन ने दिल्ली जाने वाले दूध को मंदसौर में ही 10 दिनों के लिए रोका है. अलग से 60 टन पाउडर का भी इंतजाम किया है. रतलाम में भी 10 दिनों के लिए दूध का स्टॉक किया गया है. नीमच में पड़ोसी राज्य राजस्थान से दूध, फल-सब्जी की आपूर्ति की व्यवस्था की गई है. 

इंदौर, रतलाम, उज्जैन और मंदसौर में शुक्रवार को सब्जी मंडियों में रोजाना की तरह सप्लाई हुई. रिटेल में भी सब्जियां बिकीं. दूध की सप्लाई भी सामान्य दिनों की तरह हुई.

सिर्फ नीमच में बंद का आंशिक असर दिखाई दिया. जीरन में कुछ गांव से आने वाले दूध की सप्लाई नहीं हो पाई.

मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के अध्यक्ष शिवकुमार शर्मा उर्फ कक्काजी ने कहा कि सरकार किसान आंदोलन को हिंसक बनाना चाह रही है. उसके लिए लट्ठ खरीदे जा रहे हैं, किसानों से मुचलका भरवाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि मुचलका सीएम शिवराज सिंह और उनके मंत्रियों को भरना चाहिए, क्योंकि सबसे बड़े अपराधी तो वही हैं. शर्मा ने व्यापारी वर्ग से किसानों के आंदोलन में सहयोग की अपील की है. उनका दावा है कि देशभर के 130 किसान संगठन इस आंदोलन में हिस्सा ले रहे हैं. हमने इसे "गांव-बंद" का नाम दिया है. फिलहाल, शहरों में नहीं जा रहे हैं.

कहा जा रहा है 4 जून तक गांवों में युवाओं के सांस्कृतिक कार्यक्रम और पुरानी खेल गतिविधियां होंगी. 5 जून को धिक्कार दिवस मनाएंगे. गांवों में ही चौपालें होंगी, जिसमें किसान विरोधी फैसलों पर चर्चा की जाएगी. 6 जून को पिछले साल मारे गए किसानों को शहीद मानते हुए श्रद्धांजलि सभा होंगी. 8 जून को असहयोग दिवस मनाया जाएगा. 10 जून को भारत बंद रहेगा.



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