60 मोबाइल निर्माता कंपनियों से यूजर्स की निजी जानकारी देने का फेसबुक पर लगा आरोप

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डेटा लीक को लेकर विवादों में रहा फेसबुक एक बार फिर चर्चा में है. दरअसल, दुनिया का सबसे बड़ा सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म बनने की महत्वाकांक्षा के साथ फेसबुक ने फोन और अन्य डिवाइस बनाने वाली कंपनियों से यूजर्स की निजी जानकारियों तक देने का बड़ा समझौता किया था. चौंकाने वाली बात यह है कि डील कुछ इस तरह की थी जिसमें यूजर्स ही नहीं उनके दोस्तों की निजी जानकारियों तक इन कंपनियों को पहुंच हो गई थी. न्यू यॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक फेसबुक ने कम से कम 60 डिवाइस मेकर्स के साथ डेटा शेयरिंग का समझौता किया था. इनमें ऐपल, ऐमजॉन, ब्लैकबेरी, माइक्रोसॉफ्ट और सैमसंग भी शामिल हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक स्मार्टफोन्स पर फेसबुक ऐप्स के इस्तेमाल की शुरुआत से ही इस तरह की डील फाइनल हो गई थी. इस डील के तहत फेसबुक अपनी पहुंच बढ़ाता जाएगा और फोन निर्माता कंपनियों को सोशल नेटवर्क के लोकप्रिय फीचर्स जैसे मेसेजिंग, 'लाइक' बटन्स और अड्रेस बुक्स आदि की जानकारी मिलती जायेगी. हालांकि कुछ समय बाद इस पार्टनरशिप से कंपनी की प्रिवेसी को लेकर चिंता बढ़ने लगी. फेसबुक ने बिना अनुमति के यूजर्स के दोस्तों के डेटा तक भी पहुंच की अनुमति डिवाइस कंपनियों को दे दी थी. फेसबुक की ओर से कहा गया था कि बाहरियों से डेटा शेयर नहीं किया जाएगा, इसके बावजूद ऐसा होता रहा है.

न्यू यॉर्क टाइम्स को पता चला है कि फोन बनाने वाली कुछ कंपनियों को यूजर्स के दोस्तों की ऐसी सूचनाएं भी मिल गई थीं, जिसको शेयर करने की उन्होंने अनुमति नहीं दी थी. बताया जा रहा है कि अप्रैल तक इस तरह की साझेदारी जारी रही. कैम्ब्रिज एनालिटिका से डेटा शेयर करने के मामले का खुलासा होने के बाद फेसबुक और इसकी गतिविधियां जांच के दायरे में आ गईं.

फेसबुक पर आरोप लगा कि करीब 5 करोड़ यूजर्स की निजी जानकारियां लीक हुईं जिसका फायदा अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डॉनल्ड ट्रंप के लिए काम कर रही फर्म कैम्ब्रिज एनालिटिका ने उठाया. आरोप है कि फर्म ने वोटर्स की राय को मैनिप्युलेट करने के लिए फेसबुक यूजर्स डेटा में सेंध लगाई. 



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