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ED की जांच में हुआ खुलासा, भगोड़े विजय माल्या का कर्ज लौटाने का नहीं था कोई इरादा, लोन लेकर विदेश में भेजता था पैसा

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भारत का करीब 9000 करोड़ रुपये लेकर देश से भागा भगोड़ा विजय माल्या का कर्ज लौटाने का कोई इरादा नहीं है. इस बात का खुलासा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से किंगफिशर की जांच में हुआ है. जांच में सामने आया है कि माल्या का कंसोर्टियम से लिए गए 5,500 करोड़ रुपये देने का कोई इरादा नहीं था. वह शुरू से ही कर्ज का पैसा विदेश भेजने लगा था.

जांच में पता चला है कि कर्ज की रिस्ट्रक्चरिंग की गई फिर भी माल्या ने मुनाफे में चल रही यूनाइटेड ब्रेवरीज और समूह की अन्य कंपनियों की पूंजी को एयरलाइंस में नहीं लगाया. बावजूद इसके उसने यूनाइटेड ब्रेवरीज से किंगफिशर को 3,516 करोड़ का अनसिक्योर्ड कर्ज दिया. जिसके कारण किंगफिशर की वैल्यू और भी घट गई.

ईडी के अनुसार किंगफिशर को एसबीआई, पीएनबी और एक्सिस बैंक ने 3,200 करोड़ रुपये का कर्ज दिया था. माल्या ने इन पैसों का बड़ा हिस्सा विमानों के लीज रेंट और रखरखाव के नाम पर विदेश भेजना शुरू कर दिया था. केवल इतना ही नहीं उसने लीज रेंट को बढ़ा चढ़ाकर भी बताया था.

ईडी की जांच में पता चला है कि माल्या ने शुरू से ही कर्ज का पैसा विदेश भेजना शुरू कर दिया था. जांच में पता चला है कि साल 2010 में रिस्ट्रक्चरिंग के बाद बैंकों ने बकाया मूलधन 6,000 करोड़ रुपये से घटाकर 5,575.72 करोड़ रुपये कर दिया था. इसके बाद दिसंबर 2010 में बंधक शेयरों का हिस्सा बेचकर कुछ रकम जुटाई गई. जिसके बाद मूलधन को और घटाकर 4,930.34 करोड़ रुपये कर दिया गया था.

ईडी का कहना है कि किंगफिशर को बार-बार याद दिलाया गया कि लीज से संबंधित दस्तावेज मुहैया कराए लेकिन कंपनी की तरफ से कोई कार्यवाई नहीं की गई. ईडी का ये निष्कर्ष है कि इस बात की योजना पहले से ही बना ली गई थी कि बैंकों से बड़ी मात्रा में कर्ज लेना है. पैसों को जालसाजी से देश के बाहर ठिकाने लगा दिया गया. वो जानबूझकर कंपनी पर कर्ज बढ़ाता जा रहा था, बावजूद इसके कि कंपनी घाटे में चल रही थी.



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