नवरात्रि के पांचवे दिन कीजिये स्कंदमाता की आराधना, होगी सुख-शांति की प्राप्ति

2016-10-05_Skandamata.JPG

कहतें हैं देवासुर संग्राम के सेनापति भगवान स्कंद की माता होने के कारण मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप को स्कंदमाता के नाम से जाना जाता है. आज नवरात्रि का पांचवा दिन है. स्कंदमाता भक्तों को सुख-शांति प्रदान करने वाली देवी है. भगवान कार्तिकेय का एक नाम स्कन्द भी है, जिसके चलते माँ भगवती को यह नाम मिला. स्कंदमाता का रूप अत्यंत सुन्दर है. स्कन्दमातृ स्वरुपिणी देवी की चार भुजाएं हैं. यह अपनी भुजाओं में स्कन्द को उठाए हुए है और एक भुजा में कमल है. माता कमल पर विराजमान होकर सभी का मंगल करती हैं. 

स्कंदमाता का स्तोत्र मंत्र इस प्रकार है
नमामि स्कन्धमातास्कन्धधारिणीम्।
समग्रतत्वसागरमपारपारगहराम्घ्
शिप्रभांसमुल्वलांस्फुरच्छशागशेखराम्।
ललाटरत्नभास्कराजगतप्रदीप्तभास्कराम्घ्
महेन्द्रकश्यपाद्दचतांसनत्कुमारसंस्तुताम्।

पौराणिक कथाओं की माने तो भगवती स्कन्दमाता ही पर्वतराज हिमालय की पुत्री पार्वती हैं. माँ को अपने पुत्र से परम स्नेह है, इसलिए माँ अपने पुत्र के नाम से स्कंदमाता भी कहलाई जाती है. मां स्कन्दमाता की उपासना से उपासक की समस्त इच्छाएं पूर्ण हो जाती हैं.

माँ स्कंदमाता का वर्ण पूर्णतः शुभ्र है. माता दुर्गा अपने पांचवें स्वरुप स्कन्दमाता के रुप में भक्तजनों के कल्याण के लिए सदैव तत्पर रहती हैं, इसलिए इन्हें कल्याणकारी देवी भी कहते हैं. 
 



loading...