धनतेरस के दिन ऐसे करें माँ लक्ष्मी को प्रसन्न, जाने शुभ मुहूर्त

2016-10-24_dhantears-2016-puja.jpg

पूरे भारत में धन की देवी माँ लक्ष्मी को माना जाता है। पौराणिक कथाओं और शास्त्रों के अनुसार माँ लक्ष्मी की उत्पत्ति समुद्र मंथन के दौरान हुई थी। उनके साथ  ही भगवान धनवन्तरि भी अमृत कलश के साथ सागर मंथन से उत्पन्न हुए थे। कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन ही धन्वन्तरि का जन्म हुआ था इसलिए इस तिथि को धनतेरस के नाम से जाना जाता है। भगवान धन्वन्तरी जब धरती पर आये थे तब उन्होंने हाथो में अमृत से भरा कलश पकड़ा था। भगवान धन्वन्तरि चूंकि कलश लेकर प्रकट हुए थे इसलिए ही इस अवसर पर बर्तन खरीदने की परम्परा है। यह भी पढ़ें: धनतेरस क्यों मनाते हैं, पढ़ें पवित्र और पौराणिक कथा

वैसे कहीं-कहीं लोग धनतेरस के दिन चांदी के सामान भी खरीदते हैं। इसके पीछे यह कारण माना जाता है कि यह चन्द्रमा का प्रतीक है जो मन को शांत रखता है और जिस किसी के भी पास संतोष रूपी धन है वहीं सबसे बड़ा धनवान है। इसके साथ ही साथ भगवान धन्वन्तरि जो चिकित्सा के देवता भी माना जाता है।

धनतेरस के दिन लोग भगवान गणेश और लक्ष्मी की मूर्ति खरीदते हैं और दीपावली की रात लक्ष्मी गणेश की पूजा करते हें। इस बार धनतेरस 17 अक्टूबर, तथा दीपावली 19 अक्टूबर को है। देवी लक्ष्मी जी और धन के देवता कुबेर के पूजा की परम्परा है। यह भी पढ़ें: धर्म कथा: धनतेरस के दिन क्यों प्रज्वलित करते हैं यम दीपक?

इनके अलावा यमदेव को भी दीपदान किया जाता है। इस दिन यमदेव की पूजा करने के विषय में एक मान्यता है कि इस दिन यमदेव की पूजा करने से घर में असमय मृ्त्यु का भय नहीं रहता है। धन त्रयोदशी के दिन यमदेव की पूजा करने के बाद घर के मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा की ओर मुख वाला दीपक पूरी रात्रि जलाना चाहिए। इस दीपक में कुछ पैसा व कौडी भी डाली जाती है।

प्रदोष काल:- सूर्यास्त के बाद के 2 घण्टे 24 की अवधि को प्रदोषकाल के नाम से जाना जाता है। प्रदोषकाल में दीपदान व लक्ष्मी पूजन करना शुभ रहता है।

17:35 से 18:20 तक का समय धन तेरस की पूजा के लिये विशेष शुभ रहेगा।



loading...