तमिलनाडु: संकट में पलानीस्वामी सरकार, दिनाकरण के 18 विधायकों पर हाई कोर्ट का फैसला आज

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मद्रास हाई कोर्ट गुरुवार को 18 विधायकों की सदस्यता रद्द किए जाने के मामले में लगभग पांच महीने के इंतजार के बाद फैसला सुनाएगा. चीफ जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस एम सुंदर की बेंच पहले से रिजर्व किए गए फैसले को दोपहर करीब 1 बजे सुनाएगी. फैसले को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जाने लगी हैं. अगर विधायक यह केस हारते हैं तो सरकार को कोई खतरा नहीं होगा. हालांकि, 18 सीटों पर आने वाले उपचुनावों पर इसका असर पड़ सकता है. 

वहीं, अगर विधायक केस जीत जाते हैं और सरकार के खिलाफ वोट देते हैं तो सरकार गिर जाएगी. 234 सदस्यों के सदन में अगर सभी सदस्य वोट करें तो सरकार को बहुमत के लिए 117 वोटों की जरूरत होगी. मौजूदा 113 की संख्या से यह बस चार वोट अधिक है. लंबे समय से बीमार चल रहे डीएमके अध्यक्ष एम. करुणानिधि सदन की कार्यवाही में शामिल होने तो नहीं पहुंच सके हैं लेकिन पार्टी प्रवक्ता के मुताबिक वह वोट करने जरूर पहुंचेंगे। 

इस बारे में बागी नेता थंग तमिल सेल्वन ने बताया कि वह अम्मा की सरकार को गिराना नहीं चाहते, अपना हक चाहते हैं. कई बागी नेता मुख्यमंत्री पलानीस्वामी से समझौता करने के लिए भी तैयार हैं. केंद्र भी सरकार गिराने के बारे में नहीं सोच रहा.

विधायकों की सदस्यता रद्द किए जाने से बागी कैंप में काफी असर देखने को मिला है. टीटीवी दिनकरण के रवैये को 18 विधायकों में से कई सत्तावादी मानते हैं। मन्नारगुडी परिवार से आने वाले बागी नेता धीवकरण पहले ही दिनकरण के खिलाफ बगावत कर चुके हैं. 

दरअसल, सरकार गिराने की स्थिति में कोई भी विधायक दोबारा होने वाले चुनाव में अपनी जीत को लेकर आश्वस्त नहीं है. एक सीनियर मंत्री का कहना है कि विधायकों को अपनी कमजोरी के बारे में पता है. उन्होंने कहा कि जब हासिल करने से ज्यादा कुछ खोने का डर होगा तो विधायक सरकार का समर्थन करेंगे.



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