भगवान कृष्ण को प्रिय है 8 अंक, जानें इसके पीछे के रहस्य

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भगवान विष्णु ने अभी तक तेईस अवतारों को धारण किया. इन अवतारों में उनके सबसे महत्वपूर्ण अवतार श्रीराम और श्रीकृष्ण के ही माने जाते हैं. श्री कृष्ण का जन्म क्षत्रिय कुल में राजा यदु के वंश में हुआ था. आपको बता दे की भगवान कृष्ण के जन्म के समय 8 अंक का जो संयोग बना था उसमें कई रहस्य छिपे हुए हैं.

जानकारी के मुताबिक , भगवान कृष्ण का जन्म भाद्रपद महीने की कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि को महानिशीथ काल में वृष लग्न में हुआ, उस समय चंद्रमा रोहिणी नक्षत्र में भ्रमण कर रहे थे. केवल राहु को छोड़कर अन्य सभी ग्रह अपनी उच्च अवस्था में थे. 7 मुहूर्त निकलने के बाद आठवें मुहूर्त में लड्डू गोपाल का जन्म रात्रि के समय हुआ था, उस वक्त अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र थी जिनके संयोग से जयंती नामक योग बना.  

आपको बता दे की धरती पर विष्णु भगवान लड्डू गोपाल के 8वें अवतार थे. वहीँ, भविष्यवाणी हुई थी कि कंस का वध वासुदेव और देवकी की 8वीं संतान करेगी और भगवान श्रीकृष्ण ने 16,100 रानियो से विवाह किया था और इन 16100 रानियों का योग 8 आता हैं.

सबसे खास बात भगवत गीता जो भगवान कृष्ण के उपदेश हैं, उसके आठवें अध्याय का आठवां श्लोक “परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्‌. धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे” को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है. अंकशास्त्र में 8 अंक शनिदेव का माना जाता है, इसी कारण भगवान कृष्ण और शनिदेव के बीच एक विशेष संबंध है.



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