‘अपराध’...अपराध ही होता है – राज महाजन

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हमारे देश में समय–समय पर कानून बनते हैं और उनमें संशोधन भी किया जाता है. जिस मामले ने देश को सबसे ज्यादा झकझोरा वो था 16 दिसम्बर 2012 को हुआ दामिनी काण्ड. इस कुकृत्य ने भारत के साथ-साथ समस्त दुनिया की देशों को हिला कर रख दिया था. इस घृणित कुकर्म के बाद से ही महिलाओं के लिए नए-नए कानून बनाने की बातें होने लगी और कानून बने भी. परन्तु फिर भी आये दिन इतने कड़े कानून होने के महिलाओं के साथ बदसलूकी, बलात्कार छेड़खानी, छींटाकशी जैसी घटनाओं में कोई कमी नहीं आ पाई है. 

इसका बड़ा कारण है लोगों की मानसिकता और सोच में परिवर्तन न होना. इन लोगों में सिर्फ पुरुष ही नहीं बल्कि महिलायें भी शामिल हैं. हमारी बिगड़ी सोच ही हमें गलत काम करने पर अमादा करती है. हम सही-गलत का अंतर भूल जाते हैं. हवाई जहाज में हुआ ताज़ा मामला भी इसी का अभद्र उदहारण है. आमिर खान की फिल्म दंगल की अदाकारा जायरा वसीम के साथ हवाई यात्रा के दौरान छेड़छाड़ हुई. जयरा दिल्ली से मुंबई जा रहीं थीं. अपने साथ हुयी इस हरकत की जानकारी उन्होंने सोशल मीडिया पर जाहिर की. इसमें उनका दर्द साफ-साफ झलक रहा है. अदाकारा के मुताबिक, जब वह दिल्ली से मुंबई के जहाज में यात्रा कर रही थी, तो उसकी पिछली सीट पर बैठा व्यक्ति अपने पैर से उसके शरीर को सहला रहा था. उन्होंने कहा कि हवाई जहाज के कमर्चारियों ने शिकायत सुनने के बाद भी कोई मदद नहीं की.

मामला उजागर होने के बाद इस सम्बन्ध में संज्ञान लेते हुए पुलिस ने उस अज्ञात शख्स के खिलाफ मामला पंजीकृत कर लिया है. महिला आयोग ने भी सख्त रुख अपनाया है. उड्डयन मंत्री ने कहा है कि अगर मामला सही पाया गया तो संबंधित व्यक्ति को सदा के लिए हवाई यात्रा से प्रतिबंधित किया जा सकता है.
 
लेकिन कुछ ऐसे भी लोग हैं जिन्होंने जायरा पर ही सवाल उठा दिए. लोगों की संकीर्णता तो देखिये. लोगों ने जायरा को नसीहत दे डाली कि छेड़खानी के दौरान संबंधित व्यक्ति की तस्वीर क्यूँ नहीं ली? सीट क्यों नहीं बदली? व्यक्ति को सुनाया क्यों नहीं? नसीहत देने वालों को शायद इस बात की खबर नहीं है कि इन बातों का कोई मतलब नहीं है. ज़रुरी है इस तरह की घटनाएँ थम क्यूँ नहीं रही? 

हमारे समाज में हमेशा से लड़कियों को यही सिखाया जाता है कि खुद के साथ होने वाले अत्याचारों के खिलाफ आवाज़ नहीं उठानी चाहिए. ऐसा करने से परिवार की बदनामी और खुद की बदनामी होती है. अमूमन लड़कियां खुद के साथ हो रहे अत्याचारों के खिलाफ आवाज़ नहीं उठातीं. सवाल ये नहीं कि जायरा ने उस व्यक्ति की फोटो क्यूँ ली? गंभीर सवाल है कि हवाई जहाज के कर्मचारियों ने जायरा की शिकायत पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की. क्या वो व्यक्ति ऊँचे रसूक वाला था जिस वजह से जायरा की शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया. सबसे बड़ी बात जो इस घटना से उजागर हुई है वो ये है कि महिलायें हवाई जहाज में भी सुरक्षित नहीं. अब तक इस तरह के शर्मनाक हादसे बसों, रेलों में हुआ करते थे. जहाँ इस तरह के हादसे आम सी बात हैं. 

कड़े कानून बनने के बाद भी सवाल वही का वही कि महिलाओं के खिलाफ हिंसा, छेड़खानी, बलात्कार जैसी घटनाएं कब जाकर कम होंगी. कभी-कभी अनायास ही मेरे मन में ख्याल आता है कि जितना कानून में सख्ती की जाती है उतने ही ऐसे मामले ज्यादा होते हैं. इसके पीछे एक वजह यह भी है कि लोगों में कानून का भय समाप्त होता गया है. ऐसी घटनाओं में सजा की दर बहुत कम है. बहुत-सी लड़कियां बदनामी के डर से अपने साथ हुई ऐसी घटनाओं के खिलाफ शिकायत नहीं करतीं. 

इन सबसे निपटारा करने का एक तरीका है इन मामलों के प्रकाश में आते है कड़ी कार्रवाही हो दोषियों को कड़ी सजा मिले, जिससे ऐसी विकृत मानसिकता वाले लोगों को सबक मिल सके. 

एक और कदम जो महिलायें ही उठा सकती हैं. खुद के लिए सजग होना. जब भी आपके साथ कोई भी अपराध हो तुरंत उसके खिलाफ आवाज़ उठायें. अपराध चाहे अपने द्वारा किया जाए या किसी ग़ैर द्वारा...अपराध...अपराध ही होता है. 



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