मुंबई: हाईकोर्ट ने सास-ससुर से गाली-गलौज करने वाली बहू को सुनाया घर से निकल जाने का आदेश

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मुंबई हाईकोर्ट ने पारिवारिक कलह के एक मामले में कड़ा फैसला दिया है. दरअसल, यहां एक परिवार में सास-ससुर के साथ रह रही एक बहू अक्सर उनके साथ गाली-गलौज करती थी. इस कारण अदालत ने बहू से सास-सासुर का घर छोड़कर एक माह के भीतर किराये के घर में चले जाने को कहा है. वयोवृद्ध सास-ससुर ने अदालत से गुहार लगाई थी कि उनकी बहू लगातार उन्हें गाली देती है और उनका उत्पीड़न करती है. उन्होंने कहा कि बहू ने उनका अपने ही घर में शांति से जीवन जीना हराम कर दिया है.

आदेश पारित करते हुए जस्टिस शालिनी फसाल्कर जोशी ने कहा कि अपने जीवन के अंतिम वर्षों में याचिकाकर्ता अपनी बहू के हाथों ही प्रताड़ित हो रहे हैं. यह उनके साथ क्रूरता है. वृद्ध दंपति बांद्रा वेस्ट के एक अपार्टमेंट में फ्लैट में रहते हैं. उनका बेटा मलाड में एक घर में रहता है. मलाड वाला घर भी बेटा और उसकी मां के नाम से है. अपनी याचिका में वृद्ध दंपति ने अदालत से गुहार लगाई थी कि उनके बेटे और बहू को घर के भीतर घुसने से रोका जाए. उन्होंने कहा था कि उनकी बहू बहुत ज्यादा गाली-गलौज करती है और एक लड़ाकू किस्म की महिला है. वह उनके साथ हमेशा बुरा बर्ताव करती है. उनका बेटा अपनी पत्नी की इन हरकतों को कभी-कभी नजरअंदाज करता है या फिर वह बहू के दुर्व्यहार में भागीदार भी बन जाता है. इस कारण उनकी समस्या और बढ़ जाती है. इस याचिका में वृद्ध दंपति ने यह भी कहा था कि उनका बेटा और बहू उन्हें ही अपने घर में नहीं रहना देना चाहते.

इस मामले में डिंडोषी सिविल कोर्ट ने 2016 में पारित एक आदेश में बहू को छह माह के भीतर घर खाली करने को कहा था. लेकिन बहू घर से नहीं निकली. उसे बांद्रा खार इलाके में 49 मकान दिखाए गए लेकिन उसने किसी भी मकान को पसंद नहीं किया. वह सास-ससुर के मकान में बनी रही. यहां तक कि उसने अपने 72 वर्षीय ससुर पर यौन उत्पीड़न का भी झूठा आरोप लगा दिया. इसके बाद पिछले साल वृद्धि दंपनि ने निचली अदालत के फैसले को लागू करवाने के लिए फिर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया.



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