मेघालय में NDA की सरकार, कोनराड संगमा ने ली CM पद की शपथ, राजनाथ-शाह हुए समारोह में शामिल

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नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के नेता कोनराड संगमा ने मंगलवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। शपथ ग्रहण समारोह में अमित शाह और राजनाथ सिंह शामिल हुए। मेघालय की गठबंधन सरकार में बीजेपी, एनपीपी, यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी (यूडीपी), हिल स्टेट पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (एचएसपीडीपी) और पीपुल्स डेमोक्रेटिक फ्रंट (पीडीपी) शामिल हैं। 21 सीटें जीतने वाली कांग्रेस सरकार बनाने में कामयाब नहीं हो सकी। बीजेपी को 2 सीटें मिली हैं।

कोनराड पूर्व लोकसभा स्पीकर और मेघालय के पूर्व मुख्यमंत्री पीए संगमा के बेटे हैं। उन्होंने अपनी एमबीए की पढ़ाई लंदन से की है। उनकी बहन का नाम अगाथा संगमा है। साल 2008 में पहली बार कोनराड मेघालय से विधायक चुने गए थे। इसी साल उन्हें राज्य के सबसे युवा वित्तमंत्री बनने का भी अवसर मिला था।

कोनराड के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद राजनाथ सिंह ने कहा- मैं कोनराड संगमा को बधाई देता हूं। पहले यह धारणा थी कि सिर्फ कांग्रेस ही पूर्वोत्तर राज्यों में शासन कर सकती हैं लेकिन अब भाजपा को यहां जीत मिली है तो इससे धारणा में बदलाव आएगा। 

बता दें कि राज्य में पिछले 10 सालों से कांग्रेस का शासन था। चुनाव नतीजों में वह सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी लेकिन भाजपा ने महज तीन घंटे में उसके सत्ता में दोबारा आने की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। 21 सीटें जीतने वाली कांग्रेस ने मेघालय में सरकार बनाने का दावा किया था और इसके लिए उन्होंने राज्य के गवर्नर गंगा प्रसाद से भी मुलाकात की थी। मगर बाद में भाजपा ने दूसरे दलों के साथ मिलकर 34 नवनिर्वाचित उम्मीदवारों की परेड गवर्नर के सामने करवा दी और सरकार बनाने का दावा पेश किया। जिसके बाद भाजपा और उसकी सहयोगी पार्टियों को राज्य में सरकार बनाने के लिए न्यौता दिया।

मेघालय के हाथ से निकलने के बाद राहुल गांधी ने ट्विटर पर अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की। गांधी ने कहा- महज 2 सीट के साथ भाजपा ने छल से मेघालय में सत्ता हड़प ली। यह ठीक उसी तरह है जैसे मणिपुर और गोवा में किया गया था। जहां भाजपा ने जनादेश की अनदेखी कर पावर और पैसों के दम पर अवसरवादी गठबंधन बना लिया था। बता दें कि बीते साल गोवा और मणिपुर चुनाव में सबसे ज्यादा सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी, लेकिन इसके बावजूद सरकार बनाने से चूक गई थी। तब कांग्रेस के बहुमत जुटाने से पहले ही भाजपा ने बाजी मार ली थी।

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