गोवा में लगे राष्ट्रपति शासन; सीएम और मंत्री बीमार, चरमरा गया है प्रशासनिक ढांचा : प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष

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कांग्रेस ने गोवा में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की है. कांग्रेस का कहना है कि राज्य संवैधानिक संकट का सामना कर रहा है. कांग्रेस का कहना है कि मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर पिछले कई महीनों से अपने खराब स्वास्थ्य के कारण लगातार अनुपस्थित हैं और उन्होंने अपना प्रभार किसी को सौंपा भी नहीं है. आपको बता दें कि पर्रिकर इलाज के लिए वर्तमान में अमेरिका में हैं. गोवा कांग्रेस प्रवक्ता रमाकांत खलप ने कहा कि राज्य एक संवैधानिक संकट का सामना कर रहा है. उन्होंने राष्ट्रपति शासन की अपनी पार्टी की मांग को लेकर दबाव डालने के लिए राज्यपाल मृदुला सिन्हा से समय मांगा है.

गोवा कांग्रेस प्रवक्ता रमाकांत खलप का कहना है कि पिछले 6 महीने से प्रशासनिक काम रुका पड़ा है. मुख्यमंत्री और दो मंत्री बीमार चल रहे हैं. हम उनके अच्छे स्वास्थ्य के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हैं लेकिन हम गोवा के लोगों को उनके हाल पर नहीं छोड़ सकते. राज्यपाल को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए. उन्होंने मांग की है कि सरकार को बर्खास्त कर राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया जाए.

उन्होंने कहा कि पर्रिकर अपने स्वास्थ्य कारणों से राज्य से लगातार अनुपस्थित हैं और उन्होंने अपना प्रभार किसी को सौंपा भी नहीं है. उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा कि इसके साथ ही गोवा के ऊर्जा मंत्री पांडुरंग मडकाईकर और शहरी विकास मंत्री फ्रांसिस डिसूजा भी बीमार हैं. खलप ने कहा कि इसकी कोई समयसीमा नहीं है कि मुख्यमंत्री और ये मंत्री कब तक राज्य वापस आएंगे. उन्होंने कहा कि ऐसे समय में राज्यपाल मृदुला सिन्हा को मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए जब राज्य संवैधानिक संकट का सामना कर रहा है.

पर्रिकर ने इस वर्ष मार्च से जून के बीच अग्नाशय संबंधी अपनी समस्या के लिए अमेरिका में इलाज कराया था. वह 10 अगस्त को फिर से अमेरिका गए थे और 22 अगस्त को वापस आए थे. हालांकि अगले दिन वह मुंबई के एक निजी अस्पताल में भर्ती हो गए थे. भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि पर्रिकर डॉक्टरों की सलाह पर पिछले गुरुवार को अमेरिका गए हैं और उनके आठ सितम्बर को स्वदेश वापस आने की उम्मीद है.

डिसूजा भी पिछले महीने इलाज के लिए अमेरिका गए थे जबकि मडकाईकर मस्तिष्काघात के बाद गत पांच जून से अस्पताल में भर्ती हैं. खलप ने आरोप लगाया कि पर्रिकर और दो अन्य मंत्रियों ने राज्य के प्रति कर्तव्य निर्वहन को लेकर ली गई अपनी शपथ का उल्लंघन किया है.



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