चोर पंचक : सावधान!!! क्या करें और क्या न करें

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ज्योतिष के मुताबिक़, कुछ पंचक शुभ होते हैं और कुछ अपने साथ अशुभ प्रभाव लाते हैं. पंचक के अनुसार धनिष्ठा, शतभिषा, उत्तरा भाद्रपद, पूर्वा भाद्रपद व रेवती नक्षत्र आते हैं. पंचक में ऐसे बहुत से काम हैं जिन्हें नहीं करना चाहिए, नहीं तो इनके प्रभाव अनिष्ट करने वाले होते हैं.

इस बार शुक्रवार (19 जनवरी) की दोपहर लगभग 2 बजे से पंचक शुरू होगा, जो 24 जनवरी, बुधवार को सुबह करीब 04.00 बजे तक रहेगा.

इस पंचक का नाम है चोर पंचक. इन दिनों में लेन-देन, निवेश, सौदे या किसी भी तरह की महत्वपूर्ण यात्रा नहीं करनी चाहिए.

चोर पंचक के परेसिवा भी कुछ ऐसे पंचक हैं जिनकी जानकारी होनी जरूरी है. इनमें रोग पंचक, राज पंचक, अग्नि पंचक, मृत्यु पंचक शामिल हैं. 

रोग पंचक: रविवार को शुरू होने वाला पंचक रोग पंचक कहा जाता है. इसके असर पांच दिन शारीरिक और मानसिक परेशानियाँ होती हैं. इस पंचक में किसी भी तरह के शुभ काम नहीं करने चाहिए. 

राज पंचक : सोमवार को शुरू होने वाला पंचक राज पंचक होता है. ये पंचक शुभ माना जाता है. इसके प्रभाव से इन पांच दिनों में सरकारी कामों में सफलता मिलती है. राज पंचक में संपत्ति से जुड़े काम करना भी शुभ रहता है.

अग्नि पंचक: मंगलवार को शुरू होने वाला पंचक अग्नि पंचक कहलाता है. इन पांच दिनों में कोर्ट कचहरी और विवाद आदि के फैसले, अपना हक प्राप्त करने वाले काम किए जा सकते हैं. इस पंचक में किसी भी तरह का निर्माण कार्य, औजार और मशीनरी कामों की शुरुआत करना अशुभ माना गया है. इनसे नुकसान हो सकता है.

मृत्यु पंचक: शनिवार को शुरू होने वाला पंचक का नाम मृत्यु पंचक है. नाम से ही पता चलता है कि अशुभ दिन से शुरू होने वाला ये पंचक मृत्यु के बराबर परेशानी देने वाला होता है. इन पांच दिनों में किसी भी तरह के जोखिम भरे काम नहीं करना चाहिए. इसके प्रभाव से विवाद, चोट, दुर्घटना आदि होने का खतरा रहता है.

चोर पंचक: शुक्रवार को शुरू होने के कारण इसका नाम चोर पंचक पड़ा. विद्वानों के अनुसार, इस पंचक में यात्रा करने की मनाही है. इस पंचक में लेन-देन, व्यापार और किसी भी तरह के सौदे भी नहीं करने चाहिए. मना किए गए कार्य करने से धन हानि हो सकती है.

अब जानते हैं उन कार्यों के बारे में जिन्हें पंचक में करना शुभ माना गया है: पंचक में आप विवाह, मुंडन, यात्रा, सगाई कर सकते हैं लेकिन कहस नक्षत्र में. पंचक में आने वाले नक्षत्रों में शुभ कार्य हो सकते हैं. पंचक में आने वाला उत्तराभाद्रपद नक्षत्र वार के साथ मिलकर सर्वार्थसिद्धि योग बनाता है, वहीं धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद व रेवती नक्षत्र यात्रा, व्यापार, मुंडन आदि शुभ कार्यों में श्रेष्ठ माने गए हैं. पंचक को भले ही अशुभ माना जाता है, लेकिन इस दौरान सगाई, विवाह आदि शुभ कार्य भी किए जाते हैं. पंचक में आने वाले तीन नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद व रेवती रविवार को होने से आनंद आदि 28 योगों में से 3 शुभ योग बनाते हैं, ये शुभ योग इस प्रकार हैं- चर, स्थिर व प्रवर्ध. इन शुभ योगों से सफलता व धन लाभ का विचार किया जाता है.

अब जानते हैं पंचक में ऐसे कौन से काम हैं जिन्हें करने की मनाही है:

  • पंचक में चारपाई बनवाना भी अच्छा नहीं माना जाता. विद्वानों के अनुसार ऐसा करने से कोई बड़ा संकट खड़ा हो सकता है.
  • पंचक के वक्त जिस समय घनिष्ठा नक्षत्र हो उस समय घास, लकड़ी आदि जलने वाली वस्तुएं इकट्ठी नहीं करना चाहिए, इससे आग लगने का भय रहता है.
  • पंचक के दौरान दक्षिण दिशा में यात्रा नहीं करनी चाहिए, क्योंकि दक्षिण दिशा, यम की दिशा मानी गई है. इन नक्षत्रों में दक्षिण दिशा की यात्रा करना हानिकारक माना गया है.
  • पंचक के दौरान जब रेवती नक्षत्र चल रहा हो, उस समय घर की छत नहीं बनाना चाहिए. इससे धन हानि और घर में क्लेश होता है.
  • पंचक में शव का अंतिम संस्कार करने से पहले किसी योग्य पंडित की सलाह अवश्य लेनी चाहिए. यदि ऐसा न हो पाए तो शव के साथ पांच पुतले आटे या कुश से बनाकर अर्थी पर रखना चाहिए और इन पांचों का भी शव की तरह पूर्ण विधि-विधान से अंतिम संस्कार करना चाहिए, तो पंचक दोष समाप्त हो जाता है. 



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