ताज़ा खबर

अरुणाचल प्रदेश: भारतीय सीमा में घुसे चीनी सैनिक, जवानों ने खदेड़कर वापस भेजा

2018-10-15_ChiniArmy.jpeg

चीन के सैनिक एक बार फिर भारतीय सीमा में घुस आए. अक्टूबर के पहले हफ्ते में चीन के सैनिकों ने अरुणाचल प्रदेश से लगी सीमा को लांघकर भारतीय सीमा में घुस आए. लद्दाख में हेलिकॉप्टर से भारतीय हवाई सीमा में घुसने की कोशिश की है. हालांकि जैसे ही भारतीय सेना ने उन्हें यह बताया कि वे सीमा पार कर भारतीय क्षेत्र में घुस आए हैं तो चीन के सैनिक वापस लौट गए. दोनों ही सेनाएं सेट प्रोटोकॉल के तहत इस मामले को सुलझाने की कोशिश कर रही हैं. 

पिछले साल डोकलाम को लेकर दोनों देशों के बीच लंबे समय तक विवाद चला था. भूटान के डोकलाम इलाके में चीनी सैनिकों की तरफ से सड़क निर्माण किया जा रहा था. डोकलाम इलाका भारत के चिकन नेक के बेहद करीब है और सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है. इस वजह से भारतीय सैनिकों ने डोकलाम में चीन के सड़क निर्माण को रोक दिया. इसके बाद दोनों देशों के सैनिक डोकलाम में ही डट गए. करीब 2 महीने तक डोकलाम में गतिरोध की स्थिति बनी रही. आखिर में डिप्लोमैटिक बातचीत के बाद दोनों देशों ने गतिरोध खत्म करने का फैसला किया और अपनी-अपनी सेनाओं को वापस बुला लिया था.

इससे पहले भी चीन ने भारतीय सीमा के अंदर घुसने की कोशिश की थी. सितंबर में रिपोर्ट आई थी कि चीनी सैनिक 4057 किमी लंबे लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) में लद्दाख सीमा के 400 मीटर अंदर घुस गए थे. रिपोर्ट के मुताबिक, चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने पूर्वी लद्दाख के देमचक सेक्टर में 5 टेंट गाड़ दिए थे. आपको बता दें लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल के किनारे पर डेमचक 23 विवादित और संवेदनशील जगहों में से एक जगह है. वहीं, लद्दाख में दूसरे विवादित इलाके ट्रिग हाइट, डमचेले, चुमार, स्पंगूर गैप और पंगोंग है.

रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल चीनी सेना ने 170 बार सीमा शर्तों का उल्लंघन किया है. पिछले साल यह संख्या 426 थी. वहीं, साल 2016 में संख्या 273 थी. पिछले साल जून महीने में ही चीन ने भारत-तिब्बत सीमा पर मौसम विभाग का एक स्टेशन तैयार कर दिया था. इसके बाद दोनों देशों के सैनिकों में गतिरोध हुआ था. अगस्त में विदेश राज्यमंत्री वीके सिंह ने कहा था कि डोकलाम में जहां पिछले साल विवाद हुआ था वहां किसी तरह की घटना देखने को नहीं मिली है. पिछले साल अगस्त में ही भारत और चीन ने अपने 73 दिन के गतिरोध को खत्म किया था.

वहीं पिछले महीने ही सेना के दो पूर्व कमांडरों ने कहा था कि चीन के कदमों से ऐसा लगता है कि भविष्य में डोकलाम जैसी और घटनाएं हो सकती हैं. इससे निपटने की तैयारी के लिए भारतीय सेना को प्रभावित सीमावर्ती क्षेत्रों में आधारभूत संरचना बनाने की आवश्यकता है. डोकलाम में भारत और चीन के बीच गतिरोध के दौरान सेना के पूर्वी कमांड का नेतृत्त्व करने वाले लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) प्रवीण बख्शी ने कहा कि वह सरकार के आभारी हैं क्योंकि सरकार ने उन्हें इसे लेकर कदम उठाने की पूरी स्वतंत्रता दी थी जो चीनी सैनिकों को रोकने के लिए उचित कदम रहा.



loading...