शनिदेव को तेल चढ़ाते समय करें इन मंत्रो का जाप

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हिंदू धर्म ग्रंथों में शनिदेव को न्यायाधीश कहा गया है जिसका मतलब इंसान के सभी अच्छे-बुरे कर्मों का फल देने काम शनिदेव खुद करते है। अगर जिसकी कुंडली में शनिदेव प्रतिकूल स्थान पर बैठे हों उसे जीवन भर किसी न किसी परेशानी का सामना करना पड़ता है। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी की शनि देव इतने कठोर भी नही आप चाहें तो बड़ी आसानी से आप शनिदेव को प्रसन्न भी हो जातें हैं। इस बात को तो पूरी दुनिया जानती है की हनुमान चालीसा पढ़ने वाले इंसान पर कभी शनि देव की कु दृष्टी नही पड़ती है यह वरदान खुद शनि देव ने हनुमान जी को रामायण काल में दिया था।

शनिदेव को तेल चढ़ाते समय इन मंत्र का जाप करें:

नमस्ते कोणसंस्थाय पिडगलाय नमोस्तुते। नमस्ते बभ्रुरूपाय कृष्णाय च नमोस्तु ते।।
नमस्ते रौद्रदेहाय नमस्ते चान्तकाय च। नमस्ते यमसंज्ञाय नमस्ते सौरये विभो।।
नमस्ते यंमदसंज्ञाय शनैश्वर नमोस्तुते। प्रसादं कुरू देवेश दीनस्य प्रणतस्य च।।

वैदिक शनि मंत्र:- ऊँ शन्नोदेवीर- भिष्टयऽआपो भवन्तु पीतये शंय्योरभिस्त्रवन्तुनः।

पौराणिक शनि मंत्र:- ऊँ ह्रिं नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम। छाया मार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्।।

तांत्रिक शनि मंत्र:- ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः



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