Chandrayaan 2: चंद्रमा की तीसरी कक्षा में पहुंचा ‘चंद्रयान-2’, इतिहास बनने से 11 कदम दूर

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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का महत्वकांक्षी मून मिशन ‘चंद्रयान-2’ 28 अगस्त को चंद्रमा की तीसरी कक्षा में प्रवेश कर गया है. इसरो ने ‘चंद्रयान-2’ को चांद की तीसरी कक्षा में सुबह 9.04 बजे डाला. इस ऑर्बिट में ‘चंद्रयान-2’ अगले दो दिनों तक चंद्रमा का चक्कर लगाएगा. इसके बाद अगले चरण में 30 अगस्त को ‘चंद्रयान-2’ को चौथी और एक सितंबर को चंद्रमा की पांचवीं कक्षा में डाला जाएगा.

चंद्रयान-2 ने सोमवार को चंद्रमा की सतह की कुछ तस्वीरें ली थी जिसमें कई विशाल गड्ढे (क्रेटर) दिखाई दिए थे. इसरो ने तस्वीरों को साझा करते हुए एक बयान में कहा था कि चंद्रयान द्वारा जो तस्वीरें ली गई हैं वे ‘सोमरफेल्ड’, ‘किर्कवुड’, ‘जैक्सन’, ‘माक’, ‘कोरोलेव’, ‘मित्रा’, ‘प्लासकेट’, ‘रोझदेस्तवेंस्की’ और ‘हर्माइट’ नामक विशाल गड्ढों की हैं.

इन विशाल गड्ढों का नाम महान वैज्ञानिकों, अंतरिक्ष यात्रियों और भौतिक विज्ञानियों के नाम पर रखा गया है. विशाल गड्ढे ‘मित्रा’ का नाम भारतीय भौतिक विज्ञानी व पद्म भूषण से सम्मानित प्रोफेसर शिशिर कुमार मित्रा के नाम पर रखा गया है. प्रोफेसर मित्रा को आयनमंडल और रेडियोफिजिक्स के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण कार्य के लिए जाना जाता है.

चंद्रयान 2 तीन मॉड्यूल वाला अंतरिक्ष यान है जिसमें आर्बिटर, लैंडर और रोवर शामिल है. इस यान को 22 जुलाई को प्रक्षेपित किया गया था. इसरो ने गत 21 अगस्त को ‘चंद्रयान-2’ को चांद की कक्षा में दूसरी बार आगे बढ़ाने की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की थी. इसरो ने इसके साथ ही कहा था कि इस प्रक्रिया (मैनुवर) के पूरी होने के बाद यान की सभी गतिविधियां सामान्य हैं.

यान को चंद्रमा की कक्षा में आगे बढ़ाने के लिए अभी और प्रक्रियाओं को अंजाम दिया जाएगा. आगामी दो सितंबर को लैंडर ऑर्बिटर से अलग हो जाएगा और सात सितंबर को चांद के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ करेगा.
 




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