मिशन चंद्रयान-2: 15 जुलाई को होगी लॉन्चिंग, पहली बार चांद के दक्षिण ध्रुव पर उतरेगा कोई यान

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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के महत्वकांक्षी मिशन चंद्रयान-2 के लॉन्चिंग में अब मात्र तीन दिन का समय बचा है. लगभग एक हजार करोड़ रुपये की लागत वाले इस मिशन को जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (जीएसएलवी) एमके- III रॉकेट से 15 जुलाई को तड़के 02.51 मिनट पर अंतरिक्ष में भेजा जाना है. इसके लिए सात जुलाई (रविवार) को श्री हरिकोटा के लॉन्च पैड पर जीएसएलवी मार्क तीन को स्थापित किया गया.

इसरो ने आठ जुलाई को अपनी वेबसाइट पर चंद्रयान की तस्वीरों को जारी किया. इसकी जानकारी देते हुए इसरो के अध्यक्ष डॉक्टर के सिवान ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ स्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी (आईआईएसटी) के सातवें दीक्षांत समारोह में कहा कि चंद्रयान-2 को प्रक्षेपण यान के साथ एकीकृत कर दिया गया है.

अगर चंद्रयान-2 से चांद पर बर्फ की खोज हो पाती है तो भविष्य में यहां इंसानों का प्रवास संभव हो सकेगा. जिससे यहां शोधकार्य के साथ-साथ अंतरिक्ष विज्ञान में भी नई खोजों का रास्ता खुलेगा. लॉन्चिंग के 53 से 54 दिन बाद चांद के दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान- 2 की लैंडिंग होगा और अगले 14 दिन तक यह डेटा जुटाएगा.

के सिवान ने कहा, 'चंद्रयान-2 के जरिए इसरो चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर जा रहा है जहां आज तक कोई नहीं पहुंच पाया है. अगर हम उस जोखिम को लेते हैं तो वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय को लाभ होगा. जोखिम और लाभ जुड़े हुए हैं.' चंद्रयान छह या सात सितंबर को चंद्रमा के दक्षिण ध्रुव के पास लैंड करेगा. ऐसा होते ही भारत चांद की सतह पर लैंडिंग करने वाला चौथा देश बन जाएगा.

चांद के दक्षिणी ध्रुव पर अब तक कोई भी देश नहीं जा सका है लेकिन अब यहां भारत अपने चंद्रयान- 2 को उतारकर इतिहास रचने जा रहा है. चांद के दक्षिणी ध्रुव पर सूर्य की किरणे सीधी नहीं बल्कि तिरछी पड़ती हैं. इसलिए, यहां का तापमान बहुत कम होता है. दक्षिणी ध्रुव के अधिकतर भाग पर अंधेरा रहता है. इसके अलावा यहां बड़े-बड़े क्रेटर भी हैं जिनके गढ्ढों का तापमान -250 डिग्री के आसपास पहुंच जाता है. इतनी ठंड में लैंडर और रोवर को ऑपरेट करना बड़ी चुनौती है. माना जा रहा है कि इन क्रेटर्स में जीवाश्म के अलावा पानी भी बर्फ के रूप में मौजूद है.



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