बच्चों की सुरक्षा को लेकर सीबीएसई ने जारी किये नए निर्देश, नहीं मानने पर स्कूल की मान्यता रद्द

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सीबीएसई ने स्कूल परिसरों में छात्रों की सुरक्षा की जिम्मेदारी स्कूलों पर डालते हुए संस्थानों में लागू करने के लिए सुरक्षा संबंधी नए दिशानिर्देश जारी किए. इन्हें नहीं लागू करने पर उनकी मान्यता वापस ली जा सकती है. ये दिशानिर्देश गुड़गांव के एक स्कूल में सात वर्षीय एक बच्चे की हत्या और दिल्ली के एक स्कूल में पांच वर्षीय बच्ची से एक स्कूल कर्मी द्वारा बलात्कार की घटनाओं के बाद स्कूल परिसरों में छात्रों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ने के बीच आया हैं.

बोर्ड की ओर से निर्धारित उपायों में सुरक्षा आडिट, सीसीटीवी कैमरे लगाना, पुलिस सत्यापन, मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन, छात्रों की सुरक्षा जरूरतों के समाधान के लिए अभिभावक, शिक्षक, छात्र समिति गठन और अभिभावकों से नियमित फीडबैक लेना शामिल है. सीबीएसई के दिशानिर्देशों में कहा गया है, स्कूल परिसर में छात्रों की सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल स्कूल प्रशासन पर होगी.

यह बच्चे का मूलभूत अधिकार है कि वह ऐसे वातावरण में पढ़ाई करे जिसमें वह सुरक्षित महसूस करे तथा किसी तरह के शारीरिक या भावनात्मक उत्पीड़न से मुक्त हो. इसमें यह भी कहा गया है कि स्कूल इमारत में किसी बाहरी का प्रवेश नियंत्रित होना चाहिए और आगंतुकों की निगरानी होनी चाहिए.

दिशानिर्देश में कहा गया, बच्चों की किसी तरह के उत्पीड़न से सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए स्कूल कर्मियों को प्रशिक्षित किया जाना चाहिए. इसमें कहा गया है, स्कूल परिसर में बच्चों की सुरक्षा और कुशलता के संबंध में किसी तरह की चूक पर उचित कार्रवाई की जाएगी. इसमें बोर्ड के सम्बद्धता नियमों के प्रावधानों के तहत स्कूल की मान्यता वापस लेना शामिल है.

स्कूलों से कहा गया है कि जनता, कर्मचारियों, अभिभावकों और छात्रों की शिकायतों के समाधान के लिए अलग समितियां गठित की जाएं। इसके साथ ही यौन उत्पीड़न पर एक आतंरिक शिकायत समिति और पोक्सो कानून, 2012 के तहत समितियां हों.



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