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पंचवर्षीय योजना के बाद भी चलती रहेगी 'प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना'

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केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना 'प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना' अपने उद्देश्य की पूर्ति के लिए सतत रूप से जारी रहेगी. 12वीं पंचवर्षीय योजना के समाप्त होने जाने के बाद भी यह योजना यथावत चलती रहेगी. कैबिनेट ने इस योजना को जारी रखने के लिए अपनी मंजूरी दे दी है. केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने यह जानकारी दी. केंद्रीय मंत्री ने बताया कि आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी ने PMGSY को 12वीं पंचवर्षीय योजना के बाद भी लगातार जारी रखने की अपनी मंजूरी दे दी है.

यह 84,934 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत (केंद्र की हिस्‍सेदारी 52,900 करोड़ रुपए और राज्‍य की हिस्‍सेदारी 30,034 करोड़ रुपए) से 38,412 परिवारों को जोड़ने में मदद करेगी. इसके दायरे में (250 से अधिक आबादी) बस्ती मार्च, 2019 तक आ जाएंगी. जबकि, पीएमजीएसवाई-II और एलडब्‍ल्‍यूई ब्‍लॉक के तहत के पहचान की गई बस्तियां (100-249 आबादी) मार्च, 2010 तक इसके दायरे में होंगी.    

शुरू में पीएमजीएसवाई के लक्ष्‍यों को मार्च, 2022 तक हासिल करना था. हालांकि, पीएमजीएसवाई-I के लक्ष्‍यों को हासिल करने की अंतिम समय-सीमा मार्च, 2019 कर दी गई और फंड आवंटन में बढ़ोत्‍तरी के साथ-साथ वित्‍त पोषण के प्रारूप को भी बदल दिया गया जिसे केंद्र एवं सभी राज्‍यों के लिए 60:40 के अनुपात में और पूर्वोत्‍तर के 8 राज्‍यों एवं 3 हिमालयी राज्‍यों (जम्‍मू-कश्‍मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्‍तराखंड) के लिए 90:10 के अनुपात में निर्धारित किया गया.

पीएमजीएसवाई-II के तहत 50,000 किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण लक्ष्‍य के मुकाबले करीब 32,100 किलोमीटर लंबी सड़क 13 राज्‍यों में आवंटित की गईं जिन्‍हें पीएमजीएसवाई-II में परिवर्तित कर दिया गया है. मार्च 2018 तक कुल आवंटन के मुकाबले 12,000 किलोमीटर लंबी सड़क के कार्य पूरे किए जा चुके हैं.

आपको बता दें कि 12वीं पंचवर्षीय योजना 01 अप्रैल 2012, से शुरू होकर 31 मार्च, 2017 में समाप्त हो गई थी. चूंकि अब योजना आयोग का ही अस्तित्व नहीं है, इसलिए पंचवर्षीय योजना नामक स्कीम भी स्वत: ही समाप्त हो गई है. प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की बात करें तो यह योजना 25 दिसंबर, 2000 को शुरू किया था. इस योजना के तहत गांवों को बारहमासी सड़क मुहैया कराना था. इस योजना के तहत मैदानी इलाकों के 500 या इससे अधिक आबादी वाले इलाकों को बाहरमासी (हर मौसम में काम करने वाली) सड़कों से जोड़ना है. पहाड़ी, मरुस्थली इलकों में यह योजना 250 या इससे अधिक की आबादी वाली इलाकों को पक्की सड़क से जोड़ने के लिए है.

खास बात यह है कि इस योजना में आबादी से मतलब गांव या पंचायत न होकर ऐसी जगहों को भी शामिल किया गया जहां लोग लंबे समय तक बसते हैं. इसमें टोला, माजरा, देशम आदि बसावटें शामिल हैं. इस योजना की वर्तमान स्थिति की बात करें तो वित्त वर्ष 2015-16 के दौरान हर दिन औसतन 91 किलोमीटर लंबी ग्रामीण सड़कों का निर्माण किया गया. इस तरह कुल मिलाकर 30,500 किमी लंबी ग्रामीण सड़कों का निर्माण हुआ. इस वित्त वर्ष के दौरान 6500 बस्तियों को जोड़ा गया.



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